बहराइच। जुलाई के पहले सप्ताह में तीन दिनों की बरसात के बाद से बादल छाते तो जरूर हैं, पर बिना बरसे ही निकल जाते हैं। धान की रोपाई का समय चल रहा है। ऐसे में किसान परेशान हैं।
सही बारिश न होने के कारण किसानों की चिंता बढ़ गई है। एक जून से अब तक सिर्फ 173.12 मिमी वर्षा हुई है। बीते वर्ष 190 मिमी से अधिक वर्षा रिकॉर्ड हुई थी। पंपिंग सेट से जैसे तैसे किसान धान की रोपाई करने को मजबूर हैं।
बहराइच के14 विकासखंडों में लगभग 70 हजार हेक्टेयर भूमि में धान की पैदावार का लक्ष्य जिला प्रशासन ने इस बार निर्धारित किया था। जिले के कृषि अधिकारियों ने गांवों में चौपाल लगाकर किसानों को जागरूक करने का भी काम किया।
धान की नर्सरी की बोआई पहले ही की जा चुकी थी। अब उसे खेतों में लगाने का काम शुरू होना था। लेकिन बारिश ने इस बार किसानों का साथ नहीं दिया है।
दो जुलाई से चार जुलाई तक ही बरसात हुई है। अब किसानों को धान की रोपाई के लिए पंपिंग सेट चलाने को मजबूर होना पड़ रहा है। डीजल के महंगे दामों के कारण उनकी लागत भी बढ़ने की आशंका है।
पंपिंग सेट से सिंचाई मजबूरी, बढ़ रही लागत
खैरीघाट क्षेत्र निवासी किसान राजेंद्र पाल सिंह व मगन बिहारी मिश्रा ने बताया कि मानसून के ठीक से नहीं बरसने के कारण धान की नर्सरी प्रभावित हो रही है।
गांवों में पंपिंग सेट के लिए दो से तीन दिन पहले तक बात पक्की करनी पड़ती है। वरना लंबा इंतजार करना पड़ जाता है। किसान शिवसेवक मिश्रा व अब्दुल कुद्दूस ने बताया कि डीजल के दाम महंगे होने के कारण लगभग प्रतिदिन धान की नर्सरी की रोपाई में पांच सौ रुपये प्रति बीघे की रकम जा रही है।
चार जुलाई तक महज 169 मिमी बरसात
तहसीलों द्वारा भेजी गई रिपोर्ट के अनुसार चार जुलाई तक सबसे अधिक बरसात दर्ज हुई है। इसके अनुसार चार जुलाई को अंतिम दिन सबसे अधिक पांच मिलीमीटर बरसात सदर तहसील में हुई। चार जुलाई तक 169.75 मिमी बरसात रिकॉर्ड हुई थी। इसके बाद अब तक रिकॉर्ड होने वाली वर्षा नहीं हुई।
किसानों को दिए जा रहे सुझाव
गांवों में गोष्ठी का आयोजन किया जा रहा है। इसमें कृषि अधिकारियों और वैज्ञानिकों की ओर से किसानों को धान की रोपाई के टिप्स दिए जा रहे हैं। किसान वैज्ञानिक पद्धति से रोपाई करते हुए उत्पादन लागत को कम कर सकते हैं।
-डॉ. आरके सिंह, उपनिदेशक कृषि, बहराइच