राजीचौराहा/कैसरगंज। घाघरा नदी की कटान थम नहीं रही है। रुक-रुक कर हो रही कटान के चलते महसी और कैसरगंज तहसील क्षेत्र में नदी के किनारे बसे गांवों में दहशत है। इस बीच रात से गुरुवार दोपहर बाद 14 ग्रामीणों के मकान नदी में समाहित हो गए। वहीं 110 बीघा खेती योग्य जमीन भी कटान की भेंट चढ़ी है। जैसे-तैसे आधी-अधूरी गृहस्थी ग्रामीण बचा पाए। उसे समेटकर सभी का पलायन जारी है। सूचना के बावजूद कटान रोकने के कोई उपाय नहीं हो सके हैं न ही कोई मदद मिल सकी है।
तराई में वर्षा का क्रम थमा हुआ है। लेकिन नेपाल के पहाड़ों पर रुक-रुक कर वर्षा हो रही है। जिसका नतीजा है कि घाघरा नदी के जलस्तर में उतार-चढ़ाव का दौर चल रहा है। बुधवार देर शाम से फिर कटान तेज हो गई है। इस समय महसी तहसील का चुरईपुरवा और मंगलपुरवा गांव नदी के निशाने पर है। चुरईपुरवा गांव में 175 मकान थे। कटान में 145 मकान समा हो चुके हैं। महज 30 मकान बचे थे। इनमें पप्पू, ताहिर, सूहा, उस्मान, खालिद और अली अकबर समेत नौ लोगों के मकान को रात 10 बजे से गुरुवार दोपहर 12 बजे तक नदी की लहरों ने लील लिया। वहीं कैसरगंज के गोड़हिया नंबर तीन में हो रही कटान के चलते रमपता, जवाहिर, भवानीदीन, भुनेश, कौशलराज समेत पांच ग्रामीणों के मकान नदी में समाहित हुए हैं। इन दोनों स्थानों पर खेती योग्य जमीन भी तेजी से कट रही है। खेतों में खड़े गन्ने और धान की फसल कटने के चलते ग्रामीण परेशान हैं। उनकी मुसीबत बढ़ गई है। पैसे का इंतजाम कर फसल लगाया था परिवार के दो जून की रोटी का जुगाड़ होगा। लेकिन कटान में सबकुछ समाहित होने के चलते सभी बेबस हैं। रात में शुरू हुई कटान के कारण ग्रामीण अपनी जिंदगी जैसे-तैसे सहेज पाए। आधी अधूरी गृहस्थी ही सहेज पाए। उसे समेटकर सभी ने तटबंध और सड़क के किनारे शरण ली है। अफरा-तफरी की स्थिति है। सूचना के बावजूद न तो कटान रोकने के उपाय हुए हैं न ही ग्रामीणों को अब तक मदद मिल सकी है।
निरंतर राजस्वकर्मी तैयार कर रहे सूची, मिलेगा मुआवजा
मामूली कटान चल रही है। जलस्तर खतरे के निशान से काफी नीचे पहुंच गया है। क्षेत्रीय राजस्वकर्मी निरंतर भ्रमण कर रहे हैं। मकान, खेत कटने की सूची तैयार हो रही है। जितने भी पीड़ित हैं, उन सभी को मुआवजा प्रदान किया जाएगा। तटबंध और सड़क के किनारे बसे कटान पीड़ितों को मकान दिलाने के लिए भी जमीन की तलाश हो रही है। जमीन मिलते ही उन्हें बसाने की कवायद शुरू होगी।