- 301 मदरसों को मिली है मान्यता
- नेपाल सीमा पर संचालित हो रहे डेढ़ सौ से अधिक बिना मान्यता के मदरसा
अमित पांडेय
बहराइच। जिले में नेपाल सीमा व आसपास इलाके में करीब 495 मदरसे बिना मान्यता के चल रहे हैं। अल्पसंख्यक कल्याण विभाग की जांच में यह बातें सामने आई है। इन मदरसों में करीब 25 हजार बच्चे पढ़ते हैं, जिनका भविष्य दांव पर है। एसआईटी रिपोर्ट में बिना मान्यता मदरसों को बंद करने की शासन से की कई सिफारिश के बाद अब यहां पर भी बिना मान्यता के मदरसों का संचालन बंद कराया जा सकता है। हालांकि अभी तक विभाग की तरफ से इसके लिए कोई सार्थक पहल नहीं शुरू की गई है।
जिले में जहां 495 मदरसों का संचालन बिना मान्यता के हो रहा है। वहीं 301 मदरसा ऐसे भी हैं जिनकी मान्यता है। नेपाल सीमा क्षेत्र में करीब 150 से भी ज्यादा गैर मान्यता प्राप्त मदरसों के संचालन की बात सामने आई है। सबसे ज्यादा बिना मान्यता के मदरसे नेपाल के सीमावर्ती क्षेत्र में संचालित हो रहे हैं।
रूपईडीहा कस्बे के पास से भारत-नेपाल सीमा शुरू होती है। यहां पर नो मेंस लैंड के आस-पास वाले इलाकों में रहने वाले विशेष समुदाय के बच्चों का प्राइमरी व जूनियर विद्यालयों में नामांकन तो देखा जाता है लेकिन ये सिर्फ सरकारी योजनाओं का फायदा पाने तक ही सीमित है। (संवाद)
विदेशों से भी हो रही फंडिंग
यहां पर जो मदरसे बिना मान्यता के चल रहे हैं, उनको विदेशों से भी धन मुहैया कराया जाता है। नेपाल के रास्ते मदरसों में चीन व पाकिस्तान के लोगों का भी पैसा पहुंचता है। इसे चंदा का रूप दे दिया जाता है। अल्पसंख्यक कल्याण विभाग की माने तो जो 495 मदरसा बिना मान्यता के संचालित है।
शासन को भेजी गई है रिपोर्ट
पूर्व में हुई जांच में जिले में गैर मान्यता प्राप्त मदरसों की संख्या 495 निकली है। जबकि 301 मदरसों की मान्यता है। पूरी रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है। -संजय कुमार मिश्रा, जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी