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Bahraich News: सरयू में छोड़ा 46,380 क्यूसेक पानी, बच्चूपुरवा में कटान तेज

Sun, 05 Jul 2026 12:36 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बहराइच
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महसी में गोलागंज कोठार के निकट कटान कर रही सरयू नदी।    -संवाद
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बहराइच। तराई में भले ही मानसून की बारिश लोगों को लगातार इंतजार करा रही हो, लेकिन नेपाल के पहाड़ों पर हो रही वर्षा का असर अब बहराइच में साफ दिखने लगा है। चौधरी चरण सिंह गिरिजापुरी बैराज से सरयू नदी में 46,380 क्यूसेक पानी छोड़े जाने के बाद अब तक सूखी दिख रही नदी अचानक लबालब हो गई है।
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जलस्तर बढ़ते ही महसी के तटीय इलाकों में बाढ़ व कटान का खतरा मंडराने लगा है। सबसे पहले बच्चूपुरवा गांव कटान की जद में आ गया है, नदी तेजी से खेतों को निगल रही है। इससे ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई है।



सरयू में पानी बढ़ने के साथ ही महसी तहसील क्षेत्र के गोलागंज-कोठार के पास नदी ने तेज से कटान शुरू कर दी है। ग्रामीणों के मुताबिक कटान का दायरा तेजी से बढ़ रहा है। नदी की तेज धारा गांव की ओर बढ़ रही है। बच्चूपुरवा गांव से नदी महज 200 मीटर की दूरी पर पहुंच चुकी है।
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गांव में रहने वाले करीब 60 परिवारों के सामने अब विस्थापन का खतरा खड़ा हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि अभी तक कटान रोकने के लिए कोई सुरक्षात्मक कार्य शुरू नहीं कराया गया है।


स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि अगले कुछ दिनों तक नेपाल से पानी छोड़ा जाता रहा तो स्थिति और गंभीर हो सकती है। हर साल बाढ़ और कटान का दंश झेलने वाले ग्रामीण इस बार भी अनहोनी की आशंका से सहमे हुए हैं। लोगों ने प्रशासन से तत्काल कटानरोधी कार्य शुरू कराने और गांव की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।


उपजिलाधिकारी महसी प्रकाश सिंह ने बताया कि सरयू नदी का जलस्तर बढ़ा है और प्रशासन पूरी स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए है। सभी क्षेत्रीय लेखपालों तथा राजस्व कर्मियों को अलर्ट कर दिया गया है। तटीय गांवों की निगरानी बढ़ा दी गई है और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए आवश्यक तैयारियां पूरी हैं।




सरयू नदी की वर्तमान स्थिति:

-गिरिजापुरी बैराज से छोड़ा गया पानी : 46,380 क्यूसेक

-सबसे पहले कटान की चपेट में : बच्चूपुरवा गांव (महसी)
-गांव से नदी की दूरी : करीब 200 मीटर

-प्रभावित परिवार : लगभग 60
-प्रशासन की कार्यवाही : लेखपाल अलर्ट, तटीय क्षेत्रों की निगरानी तेज




हर साल बाढ़ की मार झेलता है महसी
महसी तहसील क्षेत्र के करीब 65 गांव और 200 से अधिक मजरे हर वर्ष बाढ़ और कटान से प्रभावित होते हैं। लगभग डेढ़ लाख की आबादी इसका असर झेलती है। नदी का जलस्तर बढ़ने के साथ ही इस बार भी प्रशासन ने चौकसी बढ़ा दी है, लेकिन तटीय गांवों के लोग समय रहते कटानरोधी कार्य शुरू कराने की मांग कर रहे हैं।
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बाढ़ से निपटने के लिए ये हैं तैयारियां:

-147 नावों की व्यवस्था
-62 लाइफ जैकेट
-26 लाइफ सेवर
-11 स्ट्रेचर
-13 बंडल रस्सियां
-10 प्रशिक्षित वालंटियर
-24 टॉर्च
-बेलहा-बहरौली तटबंध पर 13 बाढ़ चौकियां
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