बहराइच के विकास भवन सभागार में आयोजित बैठक में मौजूद कर्मचारी व अन्य।
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बहराइच। खेतों में पराली जलाने के जिले में 68 मामले सामने आए हैं, जिसमें प्रशासन की ओर से 44 मुकदमे दर्ज किए गए हैं। वहीं 1.32 लाख रुपये जुर्माना भी लगाया है। इसमें 60 हजार रुपये की वसूली की जा चुकी है। पराली जलाने को रोकने के लिए बीती देर शाम सीडीओ की अध्यक्षता में ग्राम प्रधानों की बैठक की गई।
विकास भवन सभागार में आयोजित ग्राम प्रधानों की बैठक के दौरान मुख्य विकास अधिकारी अरविंद चौहान व अपर पुलिस अधीक्षक ग्रामीण रवींद्र कुमार सिंह ने बताया कि राष्ट्रीय हरित अभिकरण नई दिल्ली एवं उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पराली जलाना पूरी तरह प्रतिबंधित व दंडनीय अपराध घोषित किया गया है। जबकि उच्चतम न्यायालय व उच्च न्यायालय की ओर से भी फसल अपशिष्ट जलाने को रोकने के लिए सख्त निर्देश दिये गये हैं।
बैठक के दौरान ग्राम प्रधानों को निर्देश दिये गये कि जनपद में फसल जलाने की एक भी घटना न होने पाये। फसल अपशिष्ट प्रबंधन के लिए कृषि विभाग की ओर से प्रचार-प्रसार किया जा रहा है। किसानों को सलाह दें कि फसल अपशिष्ट न जलाएं, बल्कि उसे खेत में मिलाकर भूमि की उर्वरा शक्ति को बढ़ायें। कृषि विभाग के माध्यम से फसल अपशिष्ट प्रबंधन के लिए अनुदान पर यंत्र भी बांटे गए हैं।
सीडीओ व अपर पुलिस अधीक्षक ने सचेत किया कि यदि कहीं पर फसल अपशिष्ट जलाने की घटना प्रकाश में आती है तो किसान सहित उप जिलाधिकारी, खंड विकास अधिकारी, राजस्व व ग्राम्य विकास के ग्राम स्तरीय अधिकारियों एवं कर्मचारियों की जिम्मेदारी निर्धारित करते हुए नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जायेगी।
बैठक के दौरान उप निदेशक कृषि डॉ. आरके सिंह ने बताया कि जनपद में एक अक्तूबर से नौ दिसंबर तक फसल अपशिष्ट जलाने की कुल 68 घटनाएं हुईं हैं, जिसमें दोषियों के विरुद्ध 44 एफआईआर दर्ज कराई गई हैं। एक लाख 32 हजार 500 रुपये का अर्थदंड लगाते हुए 60 हजार रुपये की वसूली भी की गयी है। इसके अलावा जिम्मेदार विभागीय अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध कार्रवाई भी प्रगति पर है। इस मौके पर एसडीएम, बीडीओ, एडीओ पंचायत, जिला कृषि अधिकारी, डीपीआरओ आदि मौजूद रहे।