बहराइच। सरकार की ओर से लेखपालों की हड़ताल पर रोक व एस्मा लगाने का असर दिखना शुरू हो गया है। सीआरओ ने गुरुवार को लेखपालों के प्रतिनिधि मंडल को वार्ता के लिए बुलाया। लेकिन बातचीत बेनतीजा रही।
लेखपाल आंदोलन पर अड़े रहे। प्रशासन ने 99 प्रोबेशनल लेखपालों को बर्खास्तगी का नोटिस जारी किया है। 314 लेखपालों के खिलाफ भी अनुशासनात्मक कार्रवाई का नोटिस जारी किया गया है।
गुरुवार को मुख्य राजस्व अधिकारी राजेश कुमार ने प्रतिनिधि मंडल को सुबह वार्ता के लिए बुलाया। सुबह की वार्ता विफल रहने के बाद शाम को पुन: एक प्रतिनिधि मंडल को बुलाया गया।
जिलाध्यक्ष जयराज सिंह व जिला मंत्री त्रियुगी नारायण शुक्ला की अगुवाई में गए प्रतिनिधि मंडल ने सीआरओ से दो टूक शब्दों में प्रांतीय नेतृत्व के निर्णय के बाद ही धरना समाप्त करने की बात कही। इसके बाद प्रशासन ने कार्रवाई शुरू कर दी।
सीआरओ ने बताया कि 99 प्रोबेशनल लेखपालों को बर्खास्तगी की नोटिस जारी किया है। तहसीलों में तैनात 314 लेखपालों को अनुशासनात्मक कार्रवाई का नोटिस दिया गया है। नोटिस संबंधित तहसीलों के एसडीएम द्वारा जारी हुए है।
‘शांतिपूर्ण आंदोलन को दबाना चाहती सरकार’
उत्तर प्रदेश लेखपाल संघ ने गुरुवार को भी प्रदर्शन जारी रखा। कलेक्ट्रेट में आयोजित धरने में पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष अमृतलाल श्रीवास्तव व पूर्व जिलाध्यक्ष रामसेवक वर्मा ने कहा कि लेखपाल मांगों को लेकर शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे हैं। पर, सरकार उत्पीड़नात्मक कार्रवाई कर लेखपालों की आवाज दबाना चाहती है। संघ ऐसा नहीं होने देगा।
ग्राम प्रधानों ने भी मांगों का किया समर्थन
लेखपालों की मांगों का ग्राम प्रधानों ने भी समर्थन किया। ग्राम प्रधान गुरुनरायन श्रीवास्तव, मुबारक खां, बसकत खां समेत लगभग 20 प्रधानों ने लेखपालों के प्रदर्शन को समर्थन दिया।
प्रदर्शन में पवन चौहान, महेंद्र कुमार मिश्रा, चंद्र प्रकाश पांडेय, अवधेश कुमार, अनुज श्रीवास्तव, परमानंद पाठक, अशोक श्रीवास्तव, नीरज शर्मा, राजन पांडेय, अभिनंदन सिंह आदि मौजूद रहे।