बहराइच। राज्य पोषण मिशन के अंतर्गत अधिकारियों ने प्रत्येक ब्लॉक के पांच-पांच गांव गोद लिए। इसके बावजूद कुपोषण के खिलाफ जंग में प्रशासन को थोड़ी सफलता मिली है।
70 गांवों में 369 बच्चे अभी भी अतिकुपोषित हैं। सबसे ज्यादा खस्ताहाल चित्तौरा विकासखंड है। यहां 54 बच्चे अतिकुपोषित हैं। डीपीओ का दावा है कि जल्द ही ये बच्चे पूर्णतया स्वस्थ्य हो जाएंगे।
जिला कार्यक्रम अधिकारी मनोज मौर्या ने बताया कि दिसंबर 2014 के अनुसार जिले के 70 गांवों में 1056 अतिकुपोषित बच्चे मिले थे।
पिछले छह माह में संचालित किए गए विभिन्न अभियानों का नतीजा यह है कि अब इनकी संख्या 369 रह गई है, जबकि शून्य से पांच वर्ष आयु के बच्चों की संख्या चार लाख 44 हजार 825 के सापेक्ष 82 हजार 592 बच्चे कुपोषित मिले थे।
जबकि मई की रिपोर्ट के अनुसार अब इनकी संख्या 78 हजार 446 रह गई है। उन्होंने बताया कि 2893 आंगनबाड़ी केंद्रों के जरिये इन बच्चों के सेहत पर नजर रखी जा रही है।
अतिकुपोषित बच्चों के ब्लॉकवार आंकड़े
बलहा में 30, हुजूरपुर में 22, महसी में 24, रिसिया में 28, तेजवापुर में 34, फखरपुर में 18, चित्तौरा में 54, जरवल में 24, शिवपुर में 10, मिहींपुरवा में 36, नवाबगंज में 10, कैसरगंज में 17, विशेश्वरगंज में 48 और पयागपुर में 14 बच्चे अतिकुपोषित हैं।