बहराइच। जिले के प्राथमिक विद्यालयों से वर्ष 2003 में बर्खास्त हुए 263 शिक्षकों का बनवास 12 साल बाद खत्म होने वाला है।
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान सभी बर्खास्त शिक्षकों को चार सप्ताह में सहायक अध्यापक पद पर जॉइन कराने का आदेश दिया है। कोर्ट के इस आदेश के बाद बर्खास्त शिक्षकों के चेहरे पर रौनक लौटी है।
जिले के प्राथमिक विद्यालयों में वर्ष 2003 में हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद 263 शिक्षकों की तैनाती की गई थी लेकिन तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने नियुक्ति प्रक्रिया में धांधली होने की बात कहकर सभी शिक्षकों को एक साथ बर्खास्त कर दिया था।
इस पर शिक्षकों ने न्यायालय की शरण ली थी। हाईकोर्ट ने फिर बहाली का आदेश दिया लेकिन सरकार शिक्षकों को बहाल न करने पर अड़ी रही। इसके बाद अवमानना वाद दायर हुआ तो प्रदेश सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई। वर्ष 2008 से निरंतर मामले की सुनवाई चल रही थी।
सर्वोच्च न्यायालय के कोर्ट नंबर नौ में क्रम संख्या 104 पर गुरुवार को दो न्यायाधीशों ने मामले की सुनवाई की। बहस के बाद न्यायालय ने बर्खास्त सभी 263 शिक्षकों को चार सप्ताह के अंदर सहायक अध्यापक के पद पर बहाल करने का निर्देश दिया है।
न्यायालय के आदेश की जानकारी पेशी की पैरवी करने गए बर्खास्त शिक्षक नेता निरंकार पाठक ने फोन पर दी। गौरतलब हो कि बर्खास्त शिक्षकों की बहाली के लिए पूर्व श्रम एवं सेवायोजन मंत्री डॉ. वकार अहमद शाह ने काफी पैरवी की थी।
इसके बाद राज्यमंत्री यासर शाह भी निरंतर पैरवी करते हुए आर्थिक तंगी से जूझ रहे बर्खास्त शिक्षकों की मदद कर रहे थे। न्यायालय का फैसला होने के बाद राज्यमंत्री ने भी बर्खास्त शिक्षकों को बधाई दी।
रिटायर हो गए 60 शिक्षक, तीन की हुई मौत
वर्ष 2003 में बर्खास्तगी के बाद से शिक्षक निरंतर अपनी बहाली के लिए संघर्ष कर रहे हैं। इस बीच आर्थिक तंगी के चलते तीन बर्खास्त शिक्षकों की मौत हो चुकी है। वहीं 60 ऐेसे शिक्षक हैं, जो सेवानिवृत्त की आयु पूर्ण कर चुके हैं।