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22 गांवों में भरा बाढ़ का पानी

Fri, 05 Aug 2016 10:09 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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गांवों में भरा पानी - फोटो : अमर उजाला
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घाघरा नदी के जलस्तर में गिरावट के साथ कटान तेज हो गई है। 24 घंटे के दौरान महसी और कैसरगंज क्षेत्र में 16 मकान नदी में समा गए। 30 बीघा खेती योग्य जमीन भी कटान की भेंट चढ़ गई। निचले इलाकों में आबाद 22 गांव बाढ़ के पानी से घिरे हैं। इससे जनजीवन अस्तव्यस्त है।
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घाघरा नदी के जलस्तर में उतार-चढ़ाव का दौर थम नहीं रहा है। चार दिन से तराई में वर्षा थमी है। ऐसे में जलस्तर में गिरावट हो रही है। इसके बावजूद एल्गिन ब्रिज पर घाघरा नदी खतरे के निशान से 37 सेमी ऊपर बह रही है।

केंद्रीय जल आयोग संस्थान घाघराघाट के मापक जगदीश साहनी ने बताया कि नदी में खतरे का निशान 106.07 है। शुक्रवार दोपहर में जलस्तर 106.446 मीटर रिकॉर्ड हुआ। जलस्तर में कमी आने के संकेत मिल रहे हैं।
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उधर नदी के खतरे के निशान से ऊपर होने के चलते अभी भी महसी क्षेत्र में तटबंध और घाघरा के उस पार बसे 22 गांवों में बाढ़ की स्थिति बरकरार है। गांव और घरों में पानी भरा हुआ है। इससे जनजीवन पूरी तरह अस्तव्यस्त है। राहत और बचाव कार्य नाकाफी दिख रहा है।

जलस्तर में कमी के साथ कटान भी शुरू हो गई है। नदी कायमपुर और गोलागंज टेपरी गांव के निकट महसी में कटान कर रही है। गोलागंज टेपरी निवासी अर्जुन सिंह, गुलाम, गोपाल, सुरेश, शंकर व कायमपुर निवासी जोधे, अमीन के मकान नदी में समा गए हैं।

कैसरगंज तहसील के गोड़हिया और निषादपुरवा गांव में कटान के चलते लगभग मकान नदी की लहरों के भेंट चढ़ चुके हैं। दोनों स्थानों पर 30 बीघा खेत नदी में बह गए। क्षेत्रीय राजस्व कर्मियों ने कटान की रिपोर्ट तहसील को दी लेकिन अभी तक पीड़ितों को मुआवजा नहीं मिला है। 
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