बहराइच। जिला अस्पताल को राज्य चिकित्सा महाविद्यालय से संबद्ध कर दिया गया है। मगर रोगियों को वेंटिलेटर न मिलने के कारण लखनऊ या अन्य बड़े शहरों का सहारा लेना पड़ता है। चिल्ड्रेन वार्ड के पीआईसीयू में महज 10 वेंटीलेटर हैं। इस पर भी नंबर लगता है।
गर्मी के महीने में रोगी के बढ़ने पर एक बेड पर दो-दो मरीजों को भर्ती करने की नौबत बनती है। हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने प्रदेश के अस्पताल में वेंटिलेटर की कमी पर सख्त रुख अपनाया है। अब देखना ये है कि अदालती सख्ती से पीड़ितों को कितना फायदा मिलता है।
स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं। जिला अस्पताल को राज्य चिकित्सा महाविद्यालय से संबद्ध भी कर दिया गया है लेकिन अभी तक बड़े रोगियों के लिए वेंटीलेटर की व्यवस्था नहीं हो सकी है। ऐसे में यहां के गंभीर रोगियों को लखनऊ रेफर करना मजबूरी होती है।
अस्पताल के चिल्ड्रेन वार्ड में स्थापित पीआईसीयू में महज 10 वेंटीलेटर स्थापित हैं। सभी पर मरीज भर्ती हैं। यहां आने वाले मरीजों का नंबर लगता है। उसी के अनुरूप बेड मुहैया हो पाता है। इस समय तो नंबर जल्दी आ जाता है, लेकिन गर्मी बढ़ने पर जब नन्हें रोगियों की संख्या बढ़ती है तब एक बेड पर दो-दो रोगियों को भर्ती करना मजबूरी होती है।
सात-आठ घंटे इंतजार के बाद मिलता है बेड
फुलटेकरा गांव निवासी बारातीलाल के बेटे को बुखार की शिकायत थी। दो दिन से बेटे का इलाज चल रहा है। हालत बिगड़ने पर डॉक्टरों ने वेंटीलेटर पर रखा है।
बरातीलाल ने कहा कि लगभग सात से आठ घंटे इंतजार के बाद पीआईसीयू में बेड मिला है। नहसुतिया गांव निवासी आशाराम की बेटी कामिनी का इलाज चल रहा है। आशाराम ने बताया कि एक दिन के इंतजार के बाद बेड मिल सका है।
आईसीयू स्थापना एक से डेढ़ महीने में होने की उम्मीद
जिला अस्पताल के राज्य चिकित्सा महाविद्यालय से हाल ही में संबद्ध किया गया है। मेडिकल कॉलेज की सभी सुविधाएं मुहैया कराने की कवायद चल रही है।
आईसीयू स्थापना एक से डेढ़ महीने में होने की उम्मीद है। चिल्ड्रेन वार्ड में स्थापित पीआईसीयू में भी बेड बढ़ाए जाएंगे, लेकिन कितने बेड बढ़ाए जाएंगे, इसकी जानकारी एमसीआई की टीम के आने के बाद ही हो सकेगी।
-डॉ. डीके सिंह, मुख्य चिकित्साधीक्षक