बहराइच/राजीचौराहा/मोतीपुर। घाघरा नदी का जलस्तर तेजी से कम होने लगा है। लेकिन अभी भी नदी खतरे के निशान से 18 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। इसके साथ ही कटान का कहर शुरू हो गया है। रात से दोपहर तक 18 ग्रामीणों के मकानों को नदी की लहरों ने लील लिया है। इससे हड़कंप मच गया है। ग्रामीण अपने आशियाने उजाड़कर पलायन कर रहे हैं। सूचना तहसील को दी गई है। लेकिन कटान रोकने के उपाय नहीं हो सके हैं। वहीं अभी भी 210 गांवों में बाढ़ का संकट बरकरार है। लोगों के घरों में पानी घुसा हुआ है। जनजीवन पटरी पर नहीं आ पा रहा है।
घाघरा नदी ने इस बार जमकर कहर बरपाया। बीते 13 दिनों से नदी का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर बह रहा है। रविवार से जलस्तर में तेजी से गिरावट दर्ज हुई है। फिर भी सोमवार दोपहर एल्गिन ब्रिज पर नदी का जलस्तर 106.256 मीटर मापा गया है। केंद्रीय जलायोग संस्थान घाघराघाट के मापक हरिओम ने बताया कि एक सेंटीमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से पानी कम हो रहा है। लेकिन अभी भी नदी खतरे के निशान से 18 सेंटीमीटर ऊपर है। नदी का पानी कम होने से 58 गांवों से बाढ़ खत्म हुई है। लेकिन अभी भी 210 गांवों में बाढ़ का पानी बरकरार है। इनमें महसी और कैसरगंज तहसील क्षेत्र के गांवों में जलस्तर में कमी से कटान तेज हो गई है। महसी के प्रधानुरवा, जरमापुर गांव के निकट नदी तेज कटान कर रही है। प्रधानपुरवा निवासी रमेश, रंजीत, श्रीचंद्र, राधेश्याम, परशुराम, अमृतलाल, बांके, बिहारी, प्रताप समेत 10 लोगों के मकान नदी की धारा में समाहित हुए हैं। उधर कैसरगंज के गोड़हिया नंबर तीन में गड़रियनपुरवा में तुलसी, माधव, तीजा समेत पांच लोगों के मकान कटान की भेंट चढ़े हैं। महसी के प्रधानपुरवा व बरुआ बेहड़ से उमरिया के मध्य नदी की लहरें खेती योग्य जमीन को लील रही हैं। रात से अब तक 180 बीघा धान और गन्ने की फसल नदी में समाहित हुई है। मोतीपुर तहसील अंतर्गत बुद्धूपुरवा और जोगनिया गांव निवासी अब्दुल सलाम, साबिर, मुकीम, भुलई, शौकत खान, रिजवान, जगदंबा, चुन्नू, भीखू समेत 20 से अधिक ग्रामीणों की 300 बीघा धान और गन्ने की खेती नदी की भेंट चढ़ी है। सूचना तहसील को दी गई। लेकिन कोई भी राजस्वकर्मी मौके पर नहीं पहुंचा है। इसके चलते कटान प्रभावित गांवों के लोग अपना आशियाना उजाड़कर पलायन करने को मजबूर हो गए हैं।
अब तक 183 मकान हुए खत्म
बाढ़ और कटान में अब तक 183 मकान घाघरा की भेंट चढ़े हैं। इनमें 177 कच्चे व चार पक्के मकान हैं। इन मकानों में रह रहे एक हजार लोग बेघर हुए हैं। यह सभी सड़क और तटबंध के किनारे डेरा डाले हुए हैं। इनमें महसी के कायमपुर, गोलागंज, बांसगढ़ी, सिसैया चूड़ामड़ि, पचदेवरी, कैसरगंज के गोड़हिया नंबर तीन, नानपारा के बौंडी, बेलामकन, पाठकपुरवा, मिहींपुरवा के सोमईगौढ़ी, भवनियापुर बनघुसरी गांव के पीड़ित शामिल हैं।
कटान की बनवाई जा रही सूची, मिलेगी सहायता
जलस्तर कम होने के साथ ही कटान शुरू होने की सूचना मिली है। क्षेत्रीय राजस्वकर्मियों को लगाया गया है। राजस्वकर्मी एनडीआरएफ टीम के साथ भ्रमण कर सूची तैयार कर रहे हैं। शीघ्र ही सूची मिलने पर बजट की व्यवस्था करवाकर कटान पीड़ितों को राहत मुहैया कराई जाएगी।
-संतोष कुमार राय, अपर जिलाधिकारी