तराई में वर्षा थम गई है लेकिन नेपाल के पहाड़ों पर रुक-रुक कर बारिश हो रही है। जिसके कारण घाघरा के जलस्तर में कमी नहीं आई है। महसी तहसील क्षेत्र के चार और गांव बाढ़ की चपेट में आ गए। घाघरा और सरयू ने बरुआ कोड़र गांव को घेर लिया है।
यहां 200 लोग फंस गए हैं। अब तक उन्हें बाहर निकालने के इंतजाम नहीं हुए हैं। एनडीआरएफ के आने के बावजूद राहत और बचाव कार्य शून्य है। तीन दिन से बढ़ रहा नदी का जलस्तर बुधवार सुबह खतरे के निशान से 22 सेंटीमीटर ऊपर पहुंचकर स्थिर हो गया।
वर्षा के मौसम में प्रति वर्ष महसी, कैसरगंज और नानपारा आंशिक क्षेत्र प्रभावित होता है। घाघरा और सरयू नदी की लहरें कहर बरपाती हैं। जिले में तीन दिन से रुक-रुक कर हो रही वर्षा से इस बार फिर घाघरा नदी उफान पर आ गई है।
केंद्रीय जलायोग संस्थान घाघराघाट के मापक जगदीश साहनी ने बताया कि दो सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ रहा नदी का जलस्तर बुधवार सुबह अचानक रुक गया। नदी खतरे के निशान से 22.6 सेंटीमीटर ऊपर पहुंचकर ठहरी हुई है। महसी क्षेत्र में नदी की लहरें बाढ़ का सबब बनी हुई हैं।
बरुआ कोड़र, बरुआ बेहड़, भगवापुरवा समेत चार गांव बाढ़ के पानी से घिर गए हैं। बरुआ कोड़र की स्थिति काफी खराब है। इस गांव की आबादी 200 के आसपास है। गांव में पूरब और पश्चिम से घाघरा नदी का पानी पहुंचा है। वहीं उत्तर और दक्षिण से सरयू नदी का पानी बाढ़ का सबब बना है।
गांव पूरी तरह टापू की स्थिति में है। लोगों के घरों में पानी घुस गया है। गांव के लोगों ने बाढ़ की सूचना ब्लॉक प्रमुख व क्षेत्र के अन्य लोगों को दी। ब्लॉक प्रमुख प्रतिनिधि बृजेश्वर सिंह ने गांव के लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए मंगलवार को भी तहसीलदार महसी राजेश मिश्र को सूचना दी।
लेकिन अब तक नाव की व्यवस्था नहीं हो सकी है। बाढ़ से बचाने के लिए एनडीआरएफ बुलाई गई है। लेकिन बुधवार को एनडीआरएफ की ओर से बचाव कार्य शुरू नहीं हो सका है। एनडीआरएफ के टीम कमांडर इंस्पेक्टर संजीव कुमार ने बताया कि बुधवार को जिला मुख्यालय पर बैठक बुलाई गई थी।
उसी में व्यस्त हैं। बोले, गुरुवार सुबह से बचाव कार्य शुरू करेंगे। गोलागंज, जरमापुर और कायमपुर में लहरें ग्रामीणों के मकान पर तेज कटान कर रही हैं। देर रात तक करीब छह से अधिक मकानों के नदी में समाहित होने का अनुमान लगाया जा रहा है।
निजी नावों से बाहर निकल रहे ग्रामीण
बरुआ कोड़र गांव के साथ ही फक्कड़पुरवा और भगवापुरवा गांव के लोग भी नदी की लहरों में फंसे हैं। ग्रामीणों ने किसी तरह निजी नाव की व्यवस्था की है। इसके सहारे लोग जैसे-तैसे गृहस्थी का जरूरी सामान समेटकर बाढ़ से बाहर निकलने की जुगत कर रहे हैं।
मवेशी भी मर रहे भूखे
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पशुओं के चारे का इंतजाम नहीं है। बाढ़ चौकियों पर ताला लटक रहा है। मवेशियों के चारे की भी कोई व्यवस्था नहीं हुई है। जिससे अफरातफरी की स्थिति बनी हुई है। बाढ़ क्षेत्रों के मवेशी भूखों मर रहे हैं।