बहराइच। तराई में डायरिया व बुखार से मौत का सिलसिला थम नहीं रहा है। रविवार को जिला अस्पताल में इलाज के दौरान डायरिया व बुखार से पीड़ित तीन मासूमों की सांसें थम गईं। जबकि 14 और मरीजों को यहां भर्ती किया गया है। इनमें दो की हालत नाजुक है। गंभीर मरीजों को केजीएमयू लखनऊ रेफर किया गया है।
तराई में संक्रामक रोंग थम नहीं रहे। दिमागी बुखार से प्रतिदिन औसतन दो मासूमों की सांसें थम रही हैं। स्वास्थ्य विभाग बेबस नजर आ रहा है। पयागपुर क्षेत्र के धुसवापुर गांव निवासी गोलू (07) पुत्र बैजनाथ को एक सप्ताह से बुखार आ रहा था। परिजन शुरुआत में आम बुखार मानकर मेडिकल स्टोर व झोलाछाप डॉक्टरों से इलाज करवा रहे थे। लेकिन हालत सुधरने के बजाय दिनों-दिन बिगड़ती जा रही थी। रविवार की शाम उसकी हालत ज्यादा बिगड़ गई। जिस पर परिजन आननफानन उसे लेकर जिला चिकित्सालय आए। यहां पर भर्ती कर इलाज शुरू किया गया। लेकिन इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। वहीं काजल (05) पुत्री पप्पू व स्पा (10) पुत्री भवनलाल को बुखार और डायरिया के चलते भर्ती कराया गया। उसने भी इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। वहीं बुखार व अन्य संक्रामक रोग से पीड़ित 14 मरीज भर्ती हुए हैं। इनमें विनीता (6) हरदी, पप्पू (1) भिनगा, संतोष (9) हुजूरपुर, मकसूद (3) नवाबगंज, अमरेंद्र (2) काजीपुरा, अनुराग (5) कैसरगंज, शुभम (3) फखरपुर, छोटू (2) भिनगा, कौशल (1) रिसिया, विनोद (4) हरदी, रेहान (3) मंसूरगंज, विनोद (5) कोतवाली नगर, कृष्णा (2) रामगांव, साजिद (1) नाजिरपुरा शामिल हैं। इनमें मकसूद व पप्पू की हालत नाजुक है। जिला चिकित्सालय के वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. केके वर्मा का कहना है कि मौसम में उतार चढ़ाव के चलते मरीज वायरल के शिंकजे में आ रहे हैं। ज्यादातर मरीज बुखार को साधारण बीमारी समझकर लापरवाही करते हैं। बाद में यही समस्या गंभीर हो जाती है। उन्होंने लोगों को मच्छरों से बचने व खान-पान में ध्यान देने की हिदायत दी है।