रुपईडीहा (बहराइच)। कस्बे के सीमांत इंटर कॉलेज में शनिवार को नशा उन्मूलन गोष्ठी का आयोजन हुआ। इस मौके पर भारत और नेपाल के अधिकारियों व बुद्धिजीवियों ने सीमा क्षेत्र में नशे को जड़ से मिटाने का संकल्प लिया। साथ ही युवाओं को भी नशे से दूर रहने के लिए प्रेरित किया।
रुपईडीहा में स्थित सीमांत इंटर कॉलेज के सभागार में आयोजित नशा उन्मूलन गोष्ठी की अध्यक्षता समाजसेवी व शिक्षाविद् सुभाष चंद्र पांडेय ने की। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि नेपाल के प्रदेश नंबर 5 के औषधि प्रमुख वीर बहादुर थापा ने कहा कि नेपाल की कारागार में मादक पदार्थ से जुड़े 277 मामले हैं। इनमें 30 भारतीय भी शामिल हैं। जबकि दांग जिले में 66 मुकदमे ब्राउन शुगर के चल रहे हैं, जिनमें 30 भारतीय सम्मिलित हैं।
वीर बहादुर थापा ने कहा कि 18 वर्ष से कम उम्र वाले छात्र-छात्राएं नशे की लत में आकर अपना भविष्य चौपट कर रहे हैं। नेपालगंज उद्योग वाणिज्य महासंघ के उप महासचिव तारा रोकाय ने कहा कि बच्चों को नशे के बारे में जानकारी देकर उससे होने वाले दुष्परिणामों को बताया जाए तो बच्चों को सुरक्षित किया जा सकता है।
आर्म्ड पुलिस फोर्स के 30वीं बटालियन के डीएसपी राजू शाह ने भी नशे से दूर रहने की बात कही। प्रधान प्रतिनिधि केवलपुर जुबेर फारूकी ने कहा कि रुपईडीहा में धीरे-धीरे नशीले पदार्थों को खरीदने व बेचने का कारोबार बढ़ रहा है। यह चिंता का विषय है। सशस्त्र सीमा बल के 42वीं वाहिनी के इंस्पेक्टर अरुण कुमार ने बताया कि सीमा क्षेत्र में छोटे-छोटे बच्चों द्वारा नेपाली मदिरा व नशीले पदार्थों की तस्करी कराई जाती है। समाज में लोगों को अपने बच्चों के प्रति जागरूक होना पड़ेगा, तभी पूर्णरूप से लगाम नशे पर लगाई जा सकती है।
बांके में एक संघ के अध्यक्ष रूद्र सुबेदी ने कहा कि भारत और नेपाल दोनों ओर के नशा करने वाले व्यक्ति अपराध की श्रेणी में आते हैं, क्योंकि नशे की हालत में अपराध अधिक होते हैं। बैठक में भारत-नेपाल नशा उन्मूलन समिति का गठन किया गया। इस मौके पर डॉक्टर विनोद कर्ण, रमेश अम्लानी, डॉ. सनत कुमार शर्मा, नगर प्रहरी प्रमुख नारायण डांगी, इलाका प्रहरी कार्यालय इंचार्ज बसंत बस्नेत, बैजनाथ गुप्ता आदि मौजूद रहे।