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चितौरा झील के तट पर परंपरा और आस्था का संगम

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बहराइच। सैयद सालार मसूद गाजी की दरगाह पर मुख्य मेले में शामिल होने के लिए चित्तौरा झील के तट पर परंपरा और आस्था का संगम हिलोरे ले रहा है। झील में डुबकियां लगाकर लोग पूजा-अर्चना में जुटे हुए हैं। बाहरी जनपदों से आयी दुकानें मेला परिसर में सज गई हैं। यहां से गाजी की शान में कसीदे पढ़ते हुए अकीदतमंद दरगाह शरीफ को रवाना हो रहे हैं।
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सैयद सालार मसूद गाजी की दरगाह पर चल रहे जेठ मेले में शामिल होने के लिए गोरखपुर, देवरिया, बस्ती, आजमगढ़, सिद्धार्थनगर, बाराबंकी, लखनऊ, नेपाल, दिल्ली, राजस्थान से जायरीन जत्थों में दरगाह शरीफ पहुंच रहे हैं। चित्तौरा झील के तट पर आस्था की भीड़ उमड़ रही है। परंपरा निर्वहन में श्रद्धालु झील के तट पर जुटे हुए हैं।

मुख्य मेले के पूर्व शनिवार को झील के तट पर अकीदतमंदों ने स्नान कर परंपरा का निर्वहन किया। इसके बाद यहां से गाजी की शान में कसीदे पढ़ते हुए जायरीन ने मजार शरीफ पर पहुंचकर हाजिरी लगाई। दरगाह शरीफ के मेला परिसर व नाल दरवाजा परिसर के अलावा जायरीन सलारबाग, पलरीबाग, जोहराबाग सहित विभिन्न स्थानों पर डेरों में ठहरे हुए हैं।
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