सैयद सालार मसऊद गाजी की दरगाह पर मुख्य मेला गुरुवार से शुरू होगा। ऐसे में पहले पड़ाव चित्तौरा झील पर जायरीन का रेला उमड़ने लगा है। झील तट पर अव्यवस्थाएं अधिक हैं। इसी के बीच जायरीन परंपरा का निर्वहन करने को मजबूर हैं।
जेठ मेले में शामिल होने के लिए पूर्वांचल समेत देश के विभिन्न हिस्सों से जायरीन ट्रक, ट्रैक्टर-ट्रॉली व बसों से चित्तौरा झील के तट पर पहुंच रहे हैं। जायरीन के डेरे से झील का तट गुलजार हो गया है। लेकिन झील के तट पर साफ-सफाई का अभाव है, गंदगी भी है।
इसी गंदगी में जायरीन परंपरागत तरीके से पूजा-अर्चना कर रहे हैं। तट पर परंपरा निर्वहन के बाद गाजी की शान में कसीदे पढ़ते हुए जायरीन हठीले, नगरौर होते हुए दरगाह शरीफ पहुंचकर गाजी की मजार पर हाजिरी लगा रहे हैं। झील तट पर लगभग लगभग दो लाख जायरीन के पहुंचने का अनुमान लगाया जा रहा है।
चित्तौरा झील से चलकर जायरीन हठीले होकर गुजर रहे हैं। हठीला दरगाह शरीफ में वर्षों पुरानी मुर्गा उड़ाने की परंपरा भी जायरीन निभा रहे हैं। ऐसी मान्यता है कि हठीले में मुर्गा उड़ाने से सभी दु:खों व कष्टों का निवारण होता है।