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न दूल्हा होगा न दूल्हन फिर भी आएंगी बारातें

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बहराइच। सैयद सालार मसूद गाजी की दरगाह पर लगने वाले जेठ मेले के पहले रविवार को परंपरागत विवाह की रस्म अदा की जाती है। इस रस्म अदायगी के लिए देश के विभिन्न अंचलों से बारातें आती हैं। इनमें रुदौली, टांडा, बस्ती, जौनपुर, नासिक की बारातें आकर्षण का केंद्र रहती हैं। इस बार करीब 600 बारातें दरगाह पर पहुंचेंगी। इस बारातों में न दूल्हा होता है और न दुल्हन। फिर भी वैवाहिक समारोह की तरह ही परंपराओं का निर्वहन किया जाता है। गाजे-बाजे के साथ आतिशबाजी भी होती हैं।
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सैयद सालार मसूद गाजी की दरगाह शांति, सौहार्द और हिंदू-मुस्लिम एकता का प्रतीक है। यह आस्था का ऐसा केंद्र है जहां दरगाह पर प्रति वर्ष लगने वाले जेठ मेले में दोनों समुदायों के लाखों लोग शिरकत करते हैं। गाजी की दरगाह पर जेठ मेले की शुरुआत 23 मई से हो रही है। लेकिन मुख्य जेठ मेला 26 मई को है। इस दिन 1016 वर्ष पुरानी इस परंपरा का निर्वहन पुन: किया जाएगा।

मेला शुरू होने में एक दिन शेष हैं। ऐसे में बुधवार से बाराती पहुंचने लगेंगे। दहेज के साजो सामान के साथ सभी बाराती दरगाह शरीफ के मैदान में टेंट लगाकर ठहरेंगे। फिर 26 मई को शाम सात बजे बारातें गाजे-बाजे के साथ गाजी की दरगाह की ओर चल पड़ेंगी। बारातियों का स्वागत दरगाह प्रबंध समिति के साथ जिला प्रशासन के आला अधिकारी भी करेंगे।
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इन बारातियों के हाथों में निशान, चादर, पलंग पीढ़ी व दहेज का पूरा सामान होगा। बारातें जंजीरी गेट से प्रवेश कर चमन ताड़, नाल दरवाजा होते हुए गाजी की दरगाह पर हाजिरी लगाएंगी। वहां पर पलंग पीढ़ी व दहेज का सामान रखा जाएगा। ऐसी मान्यता है कि रुदौली, बाराबंकी की रहने वाली जोहरा बीवी एक हजार 16 साल पूर्व दुल्हन बनी थीं। उन्हीं की याद में यह बारातें गाजी की दरगाह तक आती हैं।

मुख्य बारात रुदौली (बाराबंकी), टांडा, बस्ती, जौनपुर, नासिक की होती है। दरगाह प्रबंध समिति के अध्यक्ष शमशाद अहमद ने बताया कि 350 बारातें पंजीकृत हैं। जबकि प्रति वर्ष बारातों को लाने का सिलसिला बढ़ता है। ऐसे में लगभग छह सौ बारातें देश के विभिन्न हिस्सों से बहराइच पहुंचने की उम्मीद है। इस बारात में दूल्हा व दुल्हन नहीं होते हैं। लेकिन परंपरा निर्वहन में रस्म की अदायगी बिल्कुल उसी तरह होती है। जैसे वैवाहिक समारोह के समय होता है।

उपवास रखते हैं बाराती
दरगाह प्रबंध समिति के अध्यक्ष सैयद शमशाद ने बताया कि 26 मई को बारात में शामिल होने वाले बाराती पूरे दिन उपवास रखेंगे। जिस तरह लोग कन्यादान के पूर्व अन्न जल का त्याग करते हैं, उसी तर्ज पर बारात लाने वाले परंपरा का निर्वहन करते हैं। बारात की रस्म अदायगी के बाद ही सभी भोजन करेंगे।

किन्नरों की बारात की अलग होती रौनक
सैयद सालार मसूद गाजी की दरगाह पर बारातें तो छह सौ के आसपास आती हैं। लेकिन मुंबई से आने वाले किन्नरों का समूह जो बारात लेकर आता है। उस बारात की रौनक काफी अलग होती है। बाराती किन्नर मंजीरे व ढोलक व की थाप पर थिरकते हुए गाजी की मजार पहुंचकर सलाम करते हुए परंपरा का निर्वहन करते हैं।

बाराबंकी व लखनऊ की आतिशबाजी से होगी रौनक
प्रबंध समिति अध्यक्ष शमशाद ने बताया कि गाजी की दरगाह पर मुख्य मेले के दिन आने वाली बारातों में आतिशबाज भी आगे-आगे आतिशबाजी करते हुए चलते हैं। इस बार बाराबंकी व लखनऊ के आतिशबाजों से रौनक बढ़ेगी।

23 मई को होगा मेले का उद्घाटन
दरगाह प्रबंध समिति के अध्यक्ष सैयद शमशाद अहमद ने बताया कि मेले का उद्घाटन 23 मई को होगा। जबकि मुख्य मेला 26 मई को होगा। इसकी तैयारियां पूरी कर ली गईं हैं। उन्होंने बताया कि बुधवार से जायरीन व बाराती आने लगेंगे।
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