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तेज बुखार से तड़पकर चार मासूमों की सांसें थमीं

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बहराइच। तराई में फैल रहे संक्रामक रोग में तेज बुखार मासूमों की जिंदगी पर भारी पड़ रहा है। बुधवार भोर से दोपहर तक चार मासूमों ने इलाज के दौरान तड़पकर दम तोड़ दिया। वहीं 10 और रोगी भर्ती हुए हैं। इनमें चार मासूमों की हालत गंभीर होने पर डॉक्टरों ने उन्हें केजीएमयू लखनऊ रेफर कर दिया है।
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तराई में मौसम परिवर्तन के बीच तेज बुखार, डायरिया, निमोनिया, पीलिया व श्वांस की बीमारियां पैर पसारने लगी हैं। हरदी के सिपहिया प्यूली गांव निवासी शिवांगी (ढाई) को तेज बुखार की शिकायत होने पर परिवारीजनों ने जिला अस्पताल पहुंचाकर भर्ती कराया। पीआईसीयू (पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट) में इलाज के दौरान सुबह शिवांगी ने दम तोड़ दिया। वहीं कोतवाली देहात के आगापुरवा गांव निवासी समीर (ढाई) पुत्र मुकद्दर अली तथा पयागपुर के पड़री गांव निवासी रंजीत (6) पुत्र अनिल यादव को भी तेज बुखार और उल्टी-दस्त की शिकायत पर परिवारीजनों ने जिला अस्पताल पहुंचाया। लेकिन इलाज के दौरान बुधवार दोपहर में आधे-आधे घंटे के अंतराल पर दोनों मासूमों ने अंतिम सांस ली। वहीं बलरामपुर के शहर क्षेत्र निवासी अंजनी (5) पुत्री पन्नालाल को भी बुखार और उल्टी-दस्त की शिकायत पर जिला अस्पताल लाया गया। यहां अंजनी ने बुधवार को दम तोड़ा। परिवारीजन रोते-बिलखते बच्चों के शव लेकर लौट गए। वहीं बुखार, उल्टी-दस्त, निमोनिया व अन्य संक्रामक बीमारियों से पीड़ित और 10 रोगी जिला अस्पताल में भर्ती हुए हैं। इनमें मुर्तिहा निवासी शिवम (4) पुत्र ननकू, नंदिनी (10) पुत्री बदलू, रूपरानी (3) पुत्री ओमप्रकाश निवासी मल्हीपुर और नेहा (एक) पुत्री अंकित निवासी गुलामअलीपुरा को बुखार, उल्टी-दस्त के साथ श्वांस की तकलीफ थी। हालत बिगड़ने पर जिला अस्पताल से केजीएमयू लखनऊ रेफर किया गया है।

भगवान भरोसे है पीआईसीयू
बहराइच। जिला अस्पताल के चिल्ड्रेन वार्ड में गंभीर रोगों से जूझ रहे बच्चों के जीवन सुरक्षा के लिए पीआईसीयू स्थापित है। लेकिन इस आईसीयू में डेढ़ माह से एयर कंडीशन खराब है। यहां पर भर्ती रोगियों के परिवारीजन हाथ से पंखा चलाते हैं। इतना ही नहीं विद्युत सप्लाई के अभाव में उपकरण व बिजली संचालन के लिए लगी बैट्रियां भी गड़बड़ हैं। कई बैट्रियां तो फटी हुई हैं। लेकिन कार्रवाई शून्य है।
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शासन को लिखा है पत्र
आईसीयू में एसी की खराबी व अन्य उपकरणों को दुरुस्त करने के लिए शासन को पत्र लिखा गया है। फिलहाल आईसीयू के पंखे चल रहे हैं। बिजली न रहने पर जनरेटर का संचालन होता है। ऐसे में अधिक दिक्कत नहीं होती है। -पीके टंडन मुख्य चिकित्साधीक्षक जिला अस्पताल
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