बहराइच। नेपाल व तराई मेें निरंतर हो रही वर्षा के चलते सरयू और घाघरा नदियाें का उफान कम नहीं हो रहा। तीन तहसीलों के 111 गांव में बाढ़ कहर बरपा रही है। दो गांवों के लोगों का संपर्क मार्ग पूरी तरह कट गया है। इन गांवों में 1300 लोग फंसे हुए हैं। अब तक उन्हे निकालने के कोई उपाय नहीं हो सके है। लोग छत और छप्परों पर शरण लिए हुए हैं। अफरा तफरी की स्थिति है। वहीं बाढ़ के पानी में डूबकर एक मासूम की मौत हो गई। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा है। गांवों में राहत सहायता के दावे नाकाफी साबित हो रहे हैं।
बाढ़ का कहर जिले में थम नहीं रहा। हालात यह हैं कि महसी, कैसरगंज और नानपारा क्षेत्र में बाढ़ से कोहराम मचा हुआ है। घाघरा नदी एल्गिन ब्रिज पर खतरे के निशान से 62 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। केंद्रीय जलायोग संस्थान घाघराघाट के मापक सुशील कुमार शुक्ला ने बताया कि रात से नदी का पानी स्थिर है। उधर सरयू में भी उफान से हालात खराब है। महसी तहसील क्षेत्र के 41, कैसरगंज तहसील क्षेत्र के 36 और शेष नानपारा तहसील क्षेत्र के गांव बाढ़ की चपेट में हैं। लोगों के घरों में तीन से चार फुट बाढ़ का पानी भरा हुआ है। गृहस्थी पूरी तरह पानी में डूबी हुई है। लोगों को जिंदगी बचाने के छत और छप्परों के साथ पेड़ों पर शरण लेनी पड़ रही है। स्थिति निरंतर नाजुक बनी हुई है। नौ और गांव बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। तराई मेें वर्षा के चलते पुन: नदी का जलस्तर बढ़ने के संकेत भी मिल रहे हैं। वहीं बाढ़ के चलते महसी तहसील के जरमापुर और नगेश्वर पुरवा गांव का संपर्क मार्ग कट गया है। यहां लगभग 1300 की आबादी फंसी हुई है। नाव का ही सहारा है। तहसील प्रशासन द्वारा राहत और बचाव कार्य के दावे किए जा रहे हैं। इसके बावजूद त्राहि-त्राहि मची है। उधर बाढ़ में ग्राम घरेहरा नकदिल पुर निवासी पवन कुमार के पुत्र शितेश सिंह (5) की डूबकर मौत हो गई। परिवारीजनों ने बताया कि घर के अंदर भरे पानी में रात में शितेश सोते समय चारपाई से गिर गया था। सुबह उसका शव उतराता मिला तब घर में कोहराम मच गया। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा है।
इन गांवों में फंसे लोगों को नहीं मिल पा रही समुचित मदद
महसी तहसील के जरमापुर, प्रधानपुरवा, बरुआबेहड़, बरुआ कोड़र, चमरहिया, बाबूराम पुरवा, लोनियनपुरवा, मंगलपुरवा, और रामसहायपुरवा में बाढ़ में फंसे लोगों को अब तक समुचित मदद नहीं सकी है। घरों में पानी भरे होने से लोग चूल्हा भी नहीं जला पा रहे।
गांवों से निकाल रही एनडीआरएफ, पहुंच रहे लंच पैकेट
25 बाढ़ चौकियां संचालित की जा रही हैं। 92 नाव और दो मोटरबोट के द्वारा लोगों को निरंतर बाढ़ क्षेत्र से निकाला जा रहा है। एनडीआरएफ के जवान लगे हुए हैं। कुछ लोग स्वयं घर न छोड़ने के चलते बाढ़ में रह रहे हैं। लोगों को लंचपैकेट, आलू, आटा, चावल, माचिस, नमक समेत जरूरी चीजें मुहैया कराई जा रही हैं। एसडीएम और तहसीलदार के साथ राजस्वकर्मी क्षेत्र में कैंप कर रहे हैं। -संतोष कुमार राय अपर जिलाधिकारी
एल्गिन ब्रिज पर खतरे का निशान- 106.07
एल्गिन ब्रिज पर वर्तमान जलस्तर- 106.696
बौंडी में घाघरा नदी का जलस्तर- 112.200
बौंडी में खतरे का निशान - 111.135
240 बीघे खेत नदी में समाहित
घाघरा महसी तहसील क्षेत्र में तेज कटान करते हुए चुरईपुरवा और जरमापुुर के निकट खेती योग्य जमीन को खत्म कर रही है। रात से अब तक नदी ने लगभग 240 बीघे खेती योग्य जमीन लील ली है। क्षेत्र निवासी रामधीरज, बड़कऊ, बाबू, धम्मन, रामसेवक, नकई आदि का कहना है कि दो दिन में इन सबकी खेती नदी की भेंट चढ़ चुकी है।