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19 घोंसलों में पल रहा घड़ियाल व मगरमच्छ का नया कुनबा

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बिछिया (बहराइच)। कतर्नियाघाट सेंक्चुरी में गेरुआ नदी के टापू पर घड़ियाल और मगरमच्छ का नया कुनबा 19 घोसलों में पल रहा है। ये घोंसले टापू पर चार स्थानों पर चिह्नित किए गए हैं। डेढ़ माह बाद इनसे नई जिंदगियों की शुरुआत होगी।
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इनकी सुरक्षा के लिए वन विभाग ने पांच टीमें गठित की हैं। 24 घंटे कांबिंग की जा रही है। टापुओं की ओर सैलानियों की बोट ले जाने और निजी बोटों के जाने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। अभी कुछ और नेस्ट मिलने की उम्मीद है।

कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र के मध्य से होकर बहने वाली नेपाल की गेरुआ नदी घड़ियाल, मगरमच्छ और डाल्फिन का कुनबा बढ़ाने के लिए मुफीद मानी जाती है।

प्रति वर्ष मार्च के अंत से अप्रैल के अंत तक घड़ियाल और मगरमच्छ अंडे देते हैं। इन अंडों को नर और मादा घड़ियाल नदी के टापू पर घोंसला बनाकर सहेजते हैं।

इस बार भी नेस्ट बनाने का सिलसिला मार्च के अंत में शुरू हुआ था जो अब तक चल रहा है। कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र के प्रभागीय वनाधिकारी जीपी सिंह ने बताया कि गेरुआ नदी में चार स्थानों पर घड़ियाल और मगरमच्छ के 19 नेस्ट चिन्हित किए गए हैं।
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इनकी सुरक्षा के लिए वन दरोगा और वन रक्षकों की अगुआई में पांच टीमें गठित की गईं हैं। ये टीमें निरंतर गश्त कर रही हैं। उन्होंने बताया कि डेढ़ माह बाद घड़ियाल और मगरमच्छ के बच्चे 15 जून के आसपास घोंसलों से निकलेंगे, तब इन्हें नदी में सुरक्षित छोड़ा जाएगा।

एक घोंसले में होते 65 अंडे
प्रभागीय वनाधिकारी जीपी सिंह ने बताया कि घड़ियाल और मगरमच्छ के प्रजनन की स्थिति लगभग एक जैसी होती है। दोनों जलीय जीव हैं। घड़ियाल और मगरमच्छ द्वारा घोंसलों में जो अंडे सहेजे जाते हैं, उनकी संख्या 55 से 65 के बीच होती है। ऐसे में लगभग 1000 से अधिक नई जिंदगियां जून में खुली हवा में सांस ले सकेंगी।

नदी के सूखने पर टापू पर जाने पर होगा प्रतिबंध
डीएफओ ने बताया कि बैराज पर क्लोजर के कारण कभी-कभी नदी सूख जाती है। ऐसे में उस पार के लोग नदी के बीच से होकर गुजरते हैं। आने जाने वाले लोग टापू पर न पहुंचे, नेस्ट सुरक्षित रहें, इसके लिए विशेष निगरानी की जा रही है।

टैंक में सुरक्षित किए जाएंगे 500 घड़ियाल
डीएफओ ने बताया कि घड़ियाल प्रजनन केंद्र की मरम्मत कर नन्हें घड़ियालों को सुरक्षित करने की कवायद वर्ष 2014 से शुरू हुई है। इस बार भी जून में नेस्ट खुलने पर लगभग 500 नन्हें घड़ियालों को टैंक में सुरक्षित पहुंचाने का प्रयास होगा। यहां से कुछ बच्चे कुकरैल भी भेजे जा सकते हैं।

यहां मिले हैं टापू पर नेस्ट
भरथापुर के निकट व पक्के टावर के सामने टापू पर मादा घड़ियालों ने अब तक 19 नेस्ट बनाए हैं। इसके अलावा बीट नंबर छह और भवानीपुर घाट के निकट टापू पर भी सैंडबार में नेस्ट होने की उम्मीद है।

मूवमेंट पर रखी जा रही नजर
टीमें मोटरबोट द्वारा गेरुआ नदी में भ्रमण कर टापू पर मादा घड़ियाल के मूवमेंट पर नजर रख रही हैं। डीएफओ ने बताया कि अभी 12 से 15 और नेस्ट मिलने की उम्मीद है।
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