फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सूर्योपासना के लिए तैयारियां शुरू, लेकिन नदी नालों के तट गंदगी से पटे

विज्ञापन
विज्ञापन
बहराइच। छठ पूजा की तैयारियां शुरू हो गई हैं। मंगलवार को पवित्रीकरण स्नान से भगवान सूर्य की आराधना का क्रम शुरू होगा। जबकि नदी, नाले व तालाब के पूजित तट पर बुधवार को भगवान सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा। लेकिन अभी तक पूजित स्थानों पर साफ सफाई का काम शुरू नहीं हुआ है न ही प्रकाश की व्यवस्था हुई है। जिसके चलते अव्यवस्था के बीच छठ पूजा की परंपरा का निर्वहन करना सभी की मजबूरी होगी।
विज्ञापन

छठ पूजा के तहत कार्तिक शुक्ल पक्ष की षष्ठी को तालाब या नदी के तट पर भगवान सूर्य की अराधना की जाती है। शहर के सरयू नदी पर स्थित झिंगहाघाट, छोटी बेरिया, उर्रा के सोती नाला, मिहींपुरवा में सरयू भगहर नदी के तट पर रुपईडीहा के हनुमंत सरोवर तथा नेपालगंज बांके जिले में स्थित बागेश्वरी माता मंदिर के तालाब, रानी तालाब और राप्ती नदी के तट पर सूर्य देवता की अराधना के लिए दो दिन निराजल व्रत रहकर अर्चना की जाती है। वैसे इस व्रत की तैयारियां चार दिन पहले से ही शुरू हो जाती है। उसी के तहत मंगलवार को प्रथम दिन माताएं लौकी का पकवान, दूसरे दिन चावल का मीठा पकएंगी। नहाय-खाय के साथ पर्व की शुरुआत होगी। तीसरे दिन निराजल व्रत, उसी दिन नदी, तालाबों, नहरों के किनारे डूबते सूर्य को अर्घ्य, चौथे दिन उगते सूर्य को प्रात:काल अर्घ्य देकर पुत्र के सलामती की दुआ मांगते हुए अपना व्रत तोड़ती हैं। इस बार भी घरों में तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। लेकिन अभी तक नदी, नाले और तालाब के पूजित तट पर साफ सफाई नहीं हुई है। कहीं जलकुंभी और सेवार से तट पटा हुआ है तो कहीं गंदगी के चलते खड़ा होना मुश्किल हो रहा है। इसी गंदगी के बीच छठ पूजा की परंपरा का निर्वहन करना सभी की मजबूरी होगी।

इस कारण मनाया जाता है पर्व
छठ पर्व पर भगवान सूर्य की आराधना महाभारत काल से होती है। लोगों का मामना है कि महाभारत काल में दुर्योधन ने अपने मित्र कर्ण को धनुष विद्या की प्रतियोगिता मे भाग लेने के लिए किये गये शर्त को पूरा करते हुए कुंती पुत्र कर्ण को अंग प्रदेश का राज्य देकर उन्हें वहां का राजा बनाया था। राजा कर्ण ने अपने देश की जनता के सुख, समृद्धि के लिए अपने पिता सूर्य की अराधना शुरू की थी। तभी से भगवान सूर्य की अराधना कर अपने बच्चों की सलामती की दुआ माताएं मांगती आ रही हैं।
विज्ञापन


नदी, तालाब व नालों के तट की सफाई में होती है कोताही
मिहींपुरवा के उर्रा निवासी जुग्गी व सावित्री का कहना है कि छठ पर्व की शुरुआत मंगलवार से हो जाएगी। लेकिन अभी तक पूजित तालाब और नदियों के तट की साफ सफाई नहीं शुरू हुई है। जिसके चलते भोर में दिक्कतें उठानी पड़ सकती हैं। रुकमणी और रूमा का कहना है कि छठ पूजा को लेकर अक्सर प्रशासन कोताही बरतता है। वैदिक काल से सूर्योपासना का सिलसिला चल रहा है। बिहार, झारखंड, उड़ीसा, बंगाल और पूर्वी उत्तर प्रदेश के अधिसंख्य लोग जिले में निवास करते हैं। जिनका इस पर्व से जुड़ाव है। इसके बावजूद साफ सफाई के मामले में प्रशासनिक कोताही से श्रद्धालु आहत होते हैं।

सफाई व्यवस्था के दिए गए निर्देश
नगर पालिका परिषद अध्यक्ष हाजी रेहान ने बताया कि छठ पर्व के मद्देनजर झिंगहाघाट स्थित सरयू तट और छोटी बेरिया मंदिर स्थित तालाब के तट की साफ सफाई के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि मुख्य पर्व से पहले सफाई व्यवस्था दुरुस्त कर दी जाएगी।

हनुमंत सरोवर तट की नहीं हुई सफाई
रुपईडीहा कस्बे में काफी संख्या में पूर्वांचल के लोग निवास करते हैं। इन सभी के लिए छठ पर्व काफी महत्वपूर्ण है। बाजार और ग्रामीण अंचलों की महिलाएं रुपईडीहा अंतर्गत हनुमंत सरोवर के तट पर परंपरागत तरीके से पूजा अर्चना करती हैं। लेकिन अब तक तट की साफ सफाई नहीं कराई गई है। जिससे घाट के तट पर पूजा करने वाली महिलाएं काफी परेशान हैं। तट पर स्थित गंदगी के बीच ही लोग पूजा करने को विवश हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें