रेशम फार्मों पर शीघ्र ही स्थापित होगी धागाकरण इकाई
केंद्रीय रेशम बोर्ड के अध्यक्ष ने किया जनपद का दौरा
बोले, इकाई की स्थापना पर सरकार देगी 10 लाख से 65 लाख तक अनुदान
बहराइच। केंद्रीय रेशम बोर्ड, वस्त्र मंत्रालय के अध्यक्ष केएम हनुमतरायप्पा ने शुक्रवार को जनपद के भ्रमण के दौरान राजकीय रेशम फार्म कल्पीपारा का निरीक्षण किया। उन्होंने किसानों से मुलाकात कर धागाकरण इकाई की स्थापना पर 10 लाख से लेकर 65 लाख रुपये तक का अनुदान दिए जाने की बात कही। कहा कि रेशम फार्मों पर जल्द ही धागाकरण इकाई की स्थापना की जाएगी।
रेशम उद्योग से जुडे़ जनपद के विभिन्न क्षेत्रों से आए लगभग 100 रेशम किसानों से कार्यालय सभागार में मुलाकात कर बोर्ड अध्यक्ष ने समस्याएं सुनीं। रेशम कोया उत्पादकों ने बताया कि उनके द्वारा अपनी भूमि के एक एकड़ क्षेत्रफल में शहतूत वृक्षारोपण से कोया उत्पादन कर वर्ष में लगभग 60-70 हजार रुपये की आय प्राप्त की जा रही है, पर उत्पादित कोया के विपणन की समस्या है। जिससे कोया का उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है। पश्चिम बंगाल, कर्नाटक आदि से रेशम कोया खरीदने के लिए व्यापारी आते हैं, जिनके द्वारा रेशम कोया का मूल्य काफी कम दिया जाता है। इस पर अध्यक्ष हनुमतरायप्पा ने कहा कि जिन विकास खंडों में रेशम फार्म है, वहां पर शीघ्र ही धागाकरण इकाई की स्थापना की जाएगी। जिससे किसानों द्वारा उत्पादित कोये की खपत यहीं पर हो सके। उन्होंने कहा कि निजी क्षेत्र में धागाकरण इकाई की स्थापना जिसकी लागत 14 लाख है। इस पर केंद्रीय रेशम बोर्ड द्वारा 10.25 लाख रुपये की सहायता अनुदान के रूप में दी जाती है। उप निदेशक रेशम कार्यालय के माध्यम से आवेदन कर बेरोजगार धागाकरण इकाई स्थापित कर सकते हैं। ऐसे में वर्ष में 30-35 लाख रुपये की आय प्राप्त हो सकती है। आटोमेटिक धागाकरण इकाई जिसकी लागत 1.30 करोड़ है, इसके लिए केंद्रीय रेशम बोर्ड द्वारा 65 लाख रुपये का अनुदान उपलब्ध कराया जाएगा। विकास खंड मिहींपुरवा से आए किसान मोहम्मद हनीफ ने 14 लाख की धागाकरण इकाई की स्थापना के लिए सहमति जताई। इसके बाद पीडब्लूडी डाक बंगले में अध्यक्ष हनुमतरायप्पा ने जिलाधिकारी अजय दीप सिंह से मुलाकात की। कहा कि निजी क्षेत्र में जो धागाकरण इकाई स्थापित करना चाहें उनका प्रस्ताव भिजवाएं। उन्हें नि:शुल्क प्रशिक्षण के लिए बंगलोर भेजा जाएगा। इस मौके पर उपनिदेशक रेशम एके सिंह, सहायक निदेशक रेशम, लखनऊ एसपी सिंह, केंद्रीय रेशम बोर्ड के सदस्य कैलाशनाथ, रेशम विकास अधिकारी जीके तिवारी, सहायक रेशम विकास अधिकारी वीरेंद्र कुमार आदि मौजूद रहे।