तराई में गर्मी बढ़ने के साथ ही आग की लपटें कहर बरपाने लगी हैं। शनिवार को तीन गांवों में आग लगने से 13 मकान व उनमें रखा सारा सामान जल गया। एक बालिका झुलस गई, वहीं आग की चपेट में आकर चार मवेशी जिंदा जल गए। आग से नौ लाख से अधिक के नुकसान का अनुमान लगाया जा रहा है। सूचना तहसील को दी गई है, लेकिन कोई भी राजस्वकर्मी मौके पर नहीं पहुंचा। पीड़ित परिवारों के लोग खुले आसमान तले गुजर-बसर करने को मजबूर हैं।
कैसरगंज तहसील क्षेत्र के सुखनदिया गांव निवासी बाबूलाल के घर में शनिवार को दोपहर बाद करीब दो बजे अचानक आग लग गई। उस समय परिवार के लोग घर में आराम कर रहे थे। आसपास के लोगों की चीख-पुकार सुनकर घर के लोगों को आग लगने का पता चला।
सभी ने पहले आग बुझाने की कोशिश की, लेकिन सफल न होने पर भागकर जान बचाई। इस दौरान आग की चपेट में आकर बाबूलाल की पांच वर्षीय पुत्री गौरा झुलस गई। आग से घर का सारा सामान जल गया। चार बकरियों की जलकर मौत हो गई। इसी दौरान भड़की आग ने पड़ोसी छोटेलाल, राजकुमार के मकान को भी चपेट में ले लिया, जिससे घरों में रखा अनाज, कपड़े, बर्तन, जेवर आदि जल गए। ग्रामीणों ने किसी तरह आग पर काबू पाया।
उधर, गोड़हिया गांव में आग लगने से छेद्दू, प्रवेश कुमार, जगराना, मुन्नी, शिवकुमारी के मकान जल गए। यहां भी घरों से कोई भी सामान परिवारीजन बाहर नहीं निकाल सके। वहीं, महसी तहसील के तटबंध उस पार स्थित गड़रियनपुरवा गांव में आग लगने से जंगू, चिंताराम समेत चार लोगों के मकान जल गए। ग्रामीणों ने किसी आग बुझाई। आग लगने की सूचना पीड़ितों ने तहसील को दी है, लेकिन कोई भी राजस्वकर्मी मौके पर नहीं पहुंचा। आग लगने से पीड़ित परिवारों के लोग खुले आसमान के तले गुजर-बसर करने को मजबूर हैं।