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घाघरा में 13 मकान डूबे

Fri, 14 Aug 2015 10:47 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/बहराइच
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घाघरा नदी के जलस्तर में सुबह से कमी आने लगी है लेकिन कटान तेज हो गई है। नदी अभी भी खतरे के निशान से 29 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। महसी तहसील क्षेत्र के निचले इलाकों में बसे गांवो में उफनाई घाघरा का पानी अब भी भरा हुआ है जिससे जनजीवन अस्तव्यस्त है। अब तक राहत और बचाव के कोई उपाय नहीं हुए हैं।
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जलस्तर में कमी से कटान तेज हो गई है। जिससे मांझा ग्राम पंचायत का रामपालपुरवा गांव नदी के निशाने पर आ गया है। 13 ग्रामीणों के मकान सुबह से अब तक नदी में समाहित हुए हैं। इससे ग्रामीणों में अफरातफरी की स्थिति है।


एल्गिन ब्रिज पर नदी खतरे के निशान से 29 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। शुक्रवार दोपहर में नदी का जलस्तर 106.366 मीटर रिकॉर्ड किया गया। केंद्रीय जलायोग संस्थान घाघराघाट के मापक जगदीश ने बताया कि जलस्तर में निरंतर कमी आ रही है लेकिन इसके साथ ही कटान तेज हो रही है।
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खतरे के निशान से अभी भी जलस्तर ऊपर होने के कारण महसी तहसील क्षेत्र के निचले इलाकों में जलभराव है। कायमपुर, जरमापुर, पिपरी, पिपरा आदि गांवों में संपर्क मार्गों पर पानी चल रहा है। प्राथमिक विद्यालय भवन परिसर भी उफनाई घाघरा के पानी से घिरा हुआ है।

महसी तहसील क्षेत्र के ग्राम पंचायत माझा का रामपालपुरवा गांव नदी के निशाने पर आ गया है। इस गांव में लगभग 40 ग्रामीणों के मकान हैं लेकिन भोर से शुरू हुई कटान के चलते गांव निवासी देवी प्रसाद, जनकू, कोयली, रामकुमार, संतराम, रामदर्शन, फौजदार, मौजीलाल, गनेशी, सुंदर, अच्छेपाल, प्रह्लादी समेत 13 लोगों के मकान कटान की भेंट चढ़े हैं। लगभग 10 लाख की संपत्ति का नुकसान हुआ है।
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