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डायरिया और बुखार से छह मासूमों की मौत, 15 और भर्ती

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डायरिया व बुखार से छह मासूमों की मौत
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जिला अस्पताल में 15 और मरीज हुए भर्ती
बहराइच। तराई में बदल रहे मौसम के बीच डायरिया और बुखार जानलेवा बन गया है। मासूमों की जिंदगी पर संक्रामक रोग भारी पड़ने लगे हैं। सोमवार को जिला अस्पताल व ग्रामीण अंचलों के चिकित्सालयों में भर्ती छह मासूमों की इलाज के दौरान मौत हो गई। ये सभी बुखार व डायरिया की चपेट में थे। इनमें श्रावस्ती व बलरामपुर जिले का एक-एक मरीज भी शामिल है। परिवारीजन रोते-बिलखते शव लेकर घर चले गए हैं। वहीं, जिला अस्पताल में डायरिया व बुखार से पीड़ित 15 और मरीज भर्ती हुए हैं, जिनमें तीन की हालत नाजुक बताई जा रही है। उन्हें आईसीयू में शिफ्ट किया गया है।
तराई में बदल रहा मौसम संक्रामक बीमारियों के फैलने का कारण बन गया है। बुखार और डायरिया के रोगियों की संख्या तेजी से बढ़ी है, जिससे जिला अस्पताल के चिल्ड्रेन वार्ड में रोगियों की तादाद में निरंतर इजाफा हो रहा है। कोतवाली देहात के नगरौर गांव निवासी निशा कुमारी (9) को उल्टी-दस्त व बुखार की शिकायत पर जिला अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन यहां पर इलाज के दौरान निशा ने सोमवार को दोपहर में दम तोड़ दिया। वहीं, बलरामपुर के कुम्हारनपुरवा निवासी राजू (एक) पुत्र राकेश कुमार को बुखार और डायरिया की शिकायत पर परिवारीजनों ने जिला अस्पताल बलरामपुर पहुंचाया। वहां से हालत नाजुक होने पर डॉक्टरों ने राजू को जिला अस्पताल रेफर कर दिया। बहराइच में इलाज शुरू होते ही मासूम की मौत हो गई। जबकि इकौना के तेतारपुर निवासी मंशा (2) पुत्री जुग्गीलाल की भी डायरिया और बुखार से मौत हो गई। वहीं, हरदी के महसी निवासी हमजा (एक) पुत्र इमरान, महसी के तटबंध निवासी शिवम (एक) पुत्र संतोष कुमार व रुपईडीहा निवासी लक्ष्मी (डेढ़) पुत्री सीताराम ने भी इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। वहीं, जिला अस्पताल में संक्रामक रोगों से पीड़ित 15 और मरीज भर्ती हुए हैं, जिनमें तीन की हालत नाजुक बताई जा रही है।
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कोट
गंभीर हालत में परिवारीजन लाते हैं अस्पताल
अधिकांश अभिभावक बच्चों के इलाज में कोताही बरतते हैं। स्थानीय डॉक्टरों से इलाज शुरू करवाते हैं। हालत बिगड़ने पर उन्हें जिला अस्पताल लाते हैं। ऐसे में जान बचाने में काफी मुश्किल हो जाती है। अभिभावक सजग रहकर बच्चों का जीवन सुरक्षित कर सकते हैं। बच्चों के बीमार होने पर उन्हें तुरंत जिला पहुंचाएं।
डॉ. डीके सिंह, सीएमएस
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