बहराइच। जिले में घाघरा और सरयू ने तबाही मचाना शुरू कर दिया है। नेपाल से छोड़े गए पानी से कैसरगंज, महसी और नानपारा तहसील क्षेत्र में त्राहि-त्राहि मची हुई है। 62 गांव बाढ़ की चपेट में आ गए हैं।
90 हजार आबादी प्रभावित है। लोगों के घरों में पानी घुस गया है। तीन बैराजों से 3.89 लाख क्यूसेक पानी और छोड़ दिया गया है। ऐसे में मंगलवार दोपहर तक हालात और बदतर होने की आशंका है।
गांवों में लोग फंसे हैं। उनके बाहर निकलने का कोई इंतजाम नहीं है। प्रशासन के दावे हवा-हवाई साबित हो रहे हैं। लोग छतों पर शरण लिए हुए हैं।
बाढ़ के कारण कायमपुर-जरमापुर संपर्क मार्ग पर तीन फीट पानी चल रहा है। ग्रामीणों का संपर्क जिला मुख्यालय से कट गया है।
नेपाल में हो रही निरंतर वर्षा से नदियां उफना गई हैं। नेपाल से छोड़े गए पानी से जिले में घाघरा और सरयू नदी उफान पर है। केंद्रीय जलायोग संस्थान घाघरा घाट के मुताबिक नदी का जलस्तर दो सेंटी मीटर प्रति घंटा की रफ्तार से बढ़ रहा है।
देर रात जलस्तर में और तेजी से इजाफा होने के संकेत मिल रहे हैं। अलग-अलग बैराजों से 3.89 लाख क्यूसेक पानी छोड़ गया है।
इससे महसी के 28, कैसरगंज के 22 मिहींपुरवा के 16 और शिवपुर क्षेत्र के 12 गांव बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। अब तक गांव के बाहर पानी था, लेकिन अब बाढ़ का पानी लोगों के घरों में घुस गया है।
इससे न सिर्फ गृहस्थी चौपट हुई है बल्कि जनजीवन पूरी तरह अस्तव्यस्त हो गया है। जलस्तर बढ़ने के साथ नदी तेज कटान कर रही है।
महसी का नगेसरपुरवा गांव घाघरा के निशाने पर आ गया है। शिवपुर के चौकसाहार गांव को नदी ने अपने निशाने पर ले लिया है।
रविवार रात से सोमवार दोपहर तक दोनों गांव में 27 मकान कटान की भेंट चढ़ गए हैं। गांव के लोग पलायन कर रहे हैं। अफरातफरी की स्थिति है।
सूचना पाकर महसी क्षेत्र में अपर जिलाधिकारी रामसुरेश वर्मा, उप जिलाधिकारी राजेश श्रीवास्तव, तहसीलदार राजेश वर्मा, मिहींपुरवा में एसडीएम कीर्तिप्रकाश भारती व तहसीलदार केशव प्रसाद ने बाढ़ व कटान प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर जायजा लिया है।
इन अधिकारियों का कहना है कि जहां पर नाव की व्यवस्था नहीं है, वहां पर नाव के इंतजाम कराने के निर्देश दिए गए हैं। ग्रामीणों को निरंतर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की कोशिश हो रही है।
इन गांवों में बाढ़ से बदतर हुई जिंदगी
बाढ़ से महसी तहसील के कायमपुर-जरमापुर संपर्क मार्ग पर पानी तेज बहाव में बह रहा है। ऐसे में दोनों गांव का संपर्क कट गया है। लोग निकल नहीं पा रहे हैं। सेमरही, अहिरनपुरवा, पचदेवरी, मंगलपुरवा, पंडितपुरवा, मुंशीपुरवा, नईबस्ती, गोलागंज, बंसीपुरवा, जरमापुर, नगेसरपुरवा, मंगलपुरवा, चुरईपुरवा, धनावा, गौरिया, चौहानपुरवा, नयागपुरवा, बरुआ बेहड़, चौकसाहार व मिहींपुरवा के सोमईगौढ़ी, मोहनलालपुरवा, तिगड़िया, मितानपुरवा, तनाजा, नईबस्ती, मनोहर बंगला, बख्तावरगौढ़ी, बहराइचपुरवा, बाढ़पुरवा, चमरौधापुरवा, गड़रियनपुरवा, दर्जिन मौजा, शोभापुरवा, परसन्नीपुरवा और जालिमनगर में घाघरा और सरयू नदी का पानी तबाही का सबब बना हुआ है। इन गांव में 25 हजार से अधिक लोग फंसे हुए हैं। उनके निकलने के कोई इंतजाम नहीं हैं।
फंसे लोगों को सुरक्षित निकाला जाएगा
घाघरा और सरयू नदी में उफान से कुछ गांवों में बाढ़ की स्थिति है। भ्रमण कर निरंतर नजर रखी जा रही है। महसी क्षेत्र के 50 से अधिक बाढ़ व कटान पीड़ितों को पॉलिथीन व दैनिक उपयोग की वस्तुएं मुहैया कराई गई हैं। लंगर चलवाए गए हैं।
शरणालय की भी व्यवस्था की गई है। बाढ़ पीड़ितों को कोई दिक्कत न हो, इसके लिए राजस्वकर्मियों की टीमें लगाई गई हैं। नाव की व्यवस्था है। सभी को सुरक्षित निकाला जाएगा।
-रामसुरेश वर्मा, अपर जिलाधिकारी/दैवीय आपदा प्रभारी
नगेसरपुरवा में ग्रामीण उजाड़ रहे घर
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बाढ़ के साथ कटान के कारण सरयू की लहरें दुश्वारियों का सबब बन गई हैं। विकासखंड शिवपुर के खगईपुरवा चौकसाहार निवासी रमजान, जाकिर, साबिर, नजरू, जब्बार, मैकू, प्रदीप सिंह, नारायण सिंह, पंकज सिंह, लाल बाबू सिंह, अमरेन्द्र सिंह, सुरेंद्र सिंह समेत 17 लोगों के मकान नदी में समाहित हुए हैं। घाघरा नदी की कटान से महसी के नगेसरपुरवा में लोग पक्के मकानों पर हथौड़ा चला रहे हैं।
इन बैराजों से छोड़ा गया पानी
चौधरी चरण सिंह गिरिजापुरी बैराज के सहायक अभियंता एसआर वर्मा ने बताया कि गिरिजापुरी बैराज से 2,06,500, शारदा बैराज से 1,09,035 व बनबसा बैराज से 74,464 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है।
3,89,999 क्यूसेक पानी डिस्चार्ज हो रहा है। यह पानी मंगलवार दोपहर तक महसी क्षेत्र में पहुंचेगा, उसके बाद बाढ़ के तबाही की स्थिति और भयावह हो सकती है।