बौंडी (बहराइच)। कैसरगंज तहसील क्षेत्र के भिरगूपुरवा गांव में घाघरा नदी का कटान लगातार जारी है। शुक्रवार को भिरगूपुरवा के 11 मकान कटकर नदी में समा गए। कटान तेज होने से ग्रामीणों में दहशत है। कटान को देखते हुए गांव के लोग अपने मकान तोड़कर घरेलू सामान सहेजने में जुटे हुए हैं।
घाघरा नदी की बढ़ती कटान में करीब 80 बीघा खेती योग्य जमीन भी समाहित हो चुकी है। मगर प्रशासन की ओर से बचाव के कोई इंतजाम नहीं किए जा रहे हैं। इससे ग्रामीणों में आक्रोश है।
कैसरगंज तहसील क्षेत्र में घाघरा नदी की कटान जारी है। तहसील क्षेत्र के भिरगूपुरवा और चमरौटी गांव में घाघरा नदी तेजी से कटान रही है। शुक्रवार को भिरगूपुरवा निवासी वीरबाबू, शिव प्रसाद, छेदी, शिवबचन, रामजीत, सतीश चंद्र, अक्षयलाल, भगौती, विश्वनाथ, श्रीराम समेत 11 ग्रामीणों के मकान घाघरा नदी में कट कर समा गए। नदी में मकान समाने से ग्रामीण बेघर हो गए हैं।
इसके साथ ही मंझारा तौकली, गोड़हिया नंबर तीन, ग्यारह सौरेती, महावीरपुरवा, गुलाबसिंहपुरवा, रोहितपुरवा, बिरजा पकड़िया, बलराजपुरवा आदि गांव घाघरा नदी के कटान के मुहाने पर हैं। भिरगूपुरवा और चमरौटी गांव की करीब 80 बीघा कृषि योग्य भूमि भी नदी में कटकर समा हो गई।
ग्यारह सौ रेती गांव के निवासी अशोक कुमार का कहना है कि मकान कटने की सूचना तहसील प्रशासन को दी गई है। लेकिन तहसील प्रशासन ने कटान पीड़ितों को अभी तक कोई सुविधाएं नहीं उपलब्ध करायी हैं।
उधर, कटान को तेज होते देख ग्रामीण खुद ही अपने आशियाने उजाड़ रहे हैं। ग्रामीण अपने मकान तोड़कर घरेलू सामान सहेजने में लगे हुए हैं। वे अपना घरेलू सामान सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने में लगे हुए हैं। प्रशासन की अनदेखी से ग्रामीणों में आक्रोश है।
दी जाएगी सहायता
कैसरगंज तहसील क्षेत्र में घाघरा की कटान पर लगातार राजस्व कर्मी नजर रख रहे हैं। राजस्वकर्मियों की ओर से सर्वे कर रिपोर्ट आपदा कार्यालय को भेजी जा रही है। जिसके तहत पीड़ितों को राहत सहायता प्रदान की जाएगी।
- रामजीत मौर्य, उपजिलाधिकारी कैसरगंज