बहराइच। शिक्षा अधिकार अधिनियम देश में लागू तो हो गया है, लेकिन इस अधिनियम के तहत सख्ती अभी तक फाइलों में ही सिमटी है। हालात ये हैं जिले में महसी का बाहरपुर एक ऐसा गांव है, जहां के 210 बच्चों ने आज तक स्कूल नहीं देखा है। वहीं जिले के अन्य विकास खंडों में भी कई ऐसे गांव हैं, जहां आज भी तीन से 10 किलोमीटर का चक्कर लगाकर छात्र-छात्राएं स्कूल पहुंचते हैं। यहां कम से कम 267 प्राथमिक और जूनियर विद्यालय और खुलें, तब बात बने। हालांकि इस मामले में बेसिक शिक्षा विभाग ने प्रस्ताव भी शासन को भेजा है, लेकिन मंजूरी नहीं मिली है।
जिले के 14 विकास खंडों में 40 लाख की आबादी पर 2400 प्राथमिक व 986 जूनियर विद्यालय स्थापित हैं। इन स्कूलों में इस समय लगभग पौने पांच लाख छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। लेकिन इनमें नानपारा, नवाबगंज, बलहा, महसी, कैसरगंज, फखरपुर, हुजूरपुर, शिवपुर तथा मिहींपुरवा विकास खंड ऐसे हैं, जहां पर तीन से 10 किलोमीटर के मध्य एक भी प्राथमिक और जूनियर विद्यालय स्थापित नहीं हैं। ऐसे में छात्र-छात्राएं पैदल स्कूल पहुंचकर जैसे-तैसे शिक्षा के लिए संघर्ष कर रहे हैं। महसी विकास खंड का बाहरपुर गांव में तो 15 किलोमीटर के दायरे में एक भी स्कूल नहीं है। यहां के ज्यादातर लोग निरक्षर हैं। गांव में इस समय लगभग 210 बच्चे पांच से 17 की आयु वर्ग के हैं, लेकिन उन्होंने स्कूल का मुंह तक नहीं देखा है। क्षेत्र में स्कूल स्थापना के लिए भी कोई कवायद नहीं की गई है।
स्कूल ही नहीं तो कहां पढ़ें बच्चे
महसी के बाहरपुरवा गांव निवासी बाढ़ व कटान प्रभावित गंगाराम का कहना है कि गांव ही नहीं आसपास के 15 किलोमीटर की दूरी में कोई स्कूल नहीं हैं। ऐसे में छात्रों को पढ़ने के लिए कहां भेजें। गिनती, पहाड़ा और अक्षर ज्ञान किसी-किसी बच्चे को है। लेकिन कोई भी बच्चा अब तक कक्षा एक पास नहीं हो सका है। गांव निवासी तेजी प्रसाद और भूषन सिंह का कहना है कि कई बार आवाज उठाई गई है। नेताओं व अधिकारियों ने आश्वासन भी दिया, लेकिन स्कूल नहीं खुल सका।
फिरोजपुर गांव
विकास खंड नवाबगंज का फिरोजपुर गांव ऐसा गांव है जहां के चार किलोमीटर के दायरे में न प्राथमिक स्कूल है न जूनियर विद्यालय। प्रह्लाद गांव और जिगरिया गांव की दूरी चार से पांच किलोमीटर है। प्रतिदिन छात्र-छात्राएं पैदल स्कूल पहुंचकर शिक्षा ग्रहण करते हैं। इसी विकास खंड का गुलमा गांव ऐसा गांव है, जहां जूनियर स्कूल नहीं है। कक्षा पांच की पढ़ाई के बाद ज्यादातर छात्राएं घर बैठ जाती हैं। अगर जूनियर की पढ़ाई करनी होती है तो पांच किलोमीटर की दूरी तय कर रामनगर या बसऊ गांव जाना पड़ता है। यही हाल दुविधापुर के छात्र-छात्राओं का है। शिक्षा ग्रहण करने के लिए चार किलोमीटर का चक्कर काटकर सोरहिया और बाबागंज जाते हैं।
167 प्राथमिक और 100 जूनियर विद्यालय की जरूरत
तीन किलोमीटर व 800 की आबादी पर एक स्कूल की स्थापना होने का नियम शिक्षा अधिकार अधिनियम में है। इसके तहत अभी भी जिले में 167 प्राथमिक और लगभग 100 जूनियर विद्यालयों की कमी है। इस मामले में प्रस्ताव तैयार करवाकर छह माह पूर्व ही शासन को भेज दिया है। रिमाइंडर भी भेजा है। अभी स्कूलों की स्थापना को हरी झंडी नहीं मिली है। शासन का आदेश मिलते ही स्कूल स्थापना की कवायद शुरू होगी। - डॉ. अमरकांत सिंह, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी