बहराइच। अर्थव्यवस्था की धुरी कहे जाने वाले किसानों की अवस्था दयनीय है। प्रधानमंत्री की महत्वाकांक्षी फसल बीमा योजना में बैंक और बीमा कंपनी ने ऐसा पेंच फंसाया है। जिससे किसान पात्रता सूची से ही बाहर हो गए हैं। बैंक ने तो वही रटा रटाया जबाब दे दिया है कि किसानों का आधार और बाकी जरूरी दस्तावेज पोर्टल पर मैच नहीं हो पा रहे हैं। ऐसे में वह बीमा कंपनी को डेटा भेज नहीं सकते। उधर बीमा कंपनी ने भी किसानों को लेटर जारी कर कोई भुगतान न किए जाने की बात कह दी है। जबकि बीमा की प्रीमियम राशि भी किसानों के खातों से काट ली गई है।
बात तो किसानों की आय दोगुनी करने की हो रही है, लेकिन बहराइच में किसानों को अपने खून पसीने से पैदा की गई फसल की बीमा राशि तक नहीं मिल पा रही है। दरअसल जिले के 1000 किसान ऐसे हैं। जिनकी पिछले सीजन गेहूं की फसल ओलावृष्टि से तबाह हो गई थी। इसका सत्यापन भी प्रशासन ने लेखपालों से करा लिया था। सत्यापन में फसल तबाह होने की बात सही पाई गई। रिपोर्ट भी जमा कर दी गई। अब बारी थी बैंक को किसानों का डाटा पोर्टल पर अपलोड करने की। लेकिन बैंकों ने आधार, खतौनी, मोबाइल नंबर, और गाटा संख्या जैसे कागजातों में मेलजोल न हो पाने के कारण पोर्टल पर फीडिंग नहीं की।
डाटा फीड न होने के कारण यह सूची बीमा कंपनी को मिली ही नहीं। जब किसानों ने बीमा कंपनी से क्लेम करना चाहा तो कंपनी ने सभी किसानों को एक लेटर जारी कर दिया। जिसमें यह साफ दर्शाया गया है कि सूची उपलब्ध न हो पाने के कारण वह बीमा राशि नहीं दे सकते। जबकि किसानों के खाते से इसी फसल की बीमा प्रीमियम राशि काट ली गई है। अब किसान परेशान हैं। इस बारे में ओरियंटल बीमा कंपनी के वरिष्ठ प्रबंधक रामशंकर ने बताया कि मामला उनकी जानकारी में है। सभी किसानों से कहा गया है कि वह बैंक से अपनी पोर्टल आईडी लेकर एक लेटर जोनल आफिस को लिखें। इसके बाद भुगतान करने की प्रक्रिया सुनिश्चित कराएंगे।
सबसे ज्यादा आर्यावर्त ग्रामीण बैंक के खाताधारक
जिन 1000 किसानों के साथ ऐसी समस्या आई है। इनमें 750 किसानों का खाता आर्यावर्त ग्रामीण बैंक में है। बाकी के 250 किसान स्टेट बैंक ऑफ इंडिया से जुड़े हुए हैं। वैसे भी आर्यावर्त ग्रामीण बैंक के साथ ऐसी समस्याएं आए दिन किसानों को फेस करनी पड़ती हैं।
228 किसानों को मिला 25 लाख
जिले के 228 किसानों के गेहूं की फसल बर्बाद होने के बाद बीमा कंपनी को दावा मिला था। बीमा का दावा मिलने और सत्यापन कराए जाने के बाद उनको 25 लाख रुपये का भुगतान किया जा चुका है।
- दीपक मिश्रा, नोडल अधिकारी, बीमा कंपनी