बौंडी (बहराइच)। कैसरगंज तहसील क्षेत्र का भिरगूपुरवा गांव घाघरा नदी के मुहाने पर है। नदी की लहरें गांव के मकानों को काट कर नेस्तनाबूद कर रही हैं। कटान तेज होने के चलते शनिवार को भिरगूपुरवा गांव के 10 मकान कटकर नदी में समा गए। साथ ही 105 बीघा कृषि योग्य भूमि को नदी ने लील लिया है।
किसान बेबस आंखों से फसलों को नदी में समाता देख रहे हैं। प्रशासन की ओर से कटान को रोकने के लिए कोई इंतजाम नहीं किए गए हैं। कटान तेज होने से ग्रामीणों में दहशत है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव के बाहर स्थित नाले के घाघरा नदी में समाने के बाद 300 घरों पर खतरा मंडराने लगेगा।
तहसील कैसरगंज अंतर्गत भिरगूपुरवा गांव को घाघरा नदी ने निशाने पर ले रखा है। घाघरा नदी का रौद्र रूप देखकर ग्रामीण भी दहशत में हैं। भिरगूपुरवा गांव में बने मकानों को घाघरा की लहरें अपने आगोश में ले रही हैं।
गांव के बाहर नाले के उस पार स्थित ज्ञानचंद, गोपीचंद, मूसे, गंगाराम, तीरथराम, रामविलास, श्रीराम, राजा, संतराम यादव समेत 10 लोगों के मकानों को घाघरा नदी ने लील लिया है। घाघरा की लहरों में 105 बीघा खेती योग्य भूमि भी समा गई है। इस जमीन पर धान और गन्ने की फसल लगी हुई थी। किसान घाघरा नदी में अपनी फसलों को समाते हुए बेबस आंखों से देख रहे हैं।
वहीं घाघरा नदी की कटान के मुहाने पर मंझारा तौकली, गोड़हिया नंबर तीन, ग्यारह सौ रेती, महावीपुरवा, गुलासिंहपुरवा, रोहितपुरवा, चमरौधी, बिरजा पकड़िया समेत अन्य गांव भी हैं। भिरगूपुरवा निवासी बेचन राजभर ने बताया कि भिरगूपुरवा गांव के निकट एक नाला बहता है। उस नाले के उस पार घाघरा नदी बहती है। जबकि नाले के दूसरी तरफ करीब 300 मकान बने हुए हैं। अभी नदी की कटान नाले के उस पार ही है। ऐसे में अगर नाला नदी में समाया तो गांव के अस्तित्व पर संकट खड़ा हो जाएगा।
रखी जा रही है नजर
कैसरगंज तहसील क्षेत्र में अभी बाढ़ के हालात नहीं हैं। नदी का जलस्तर घटने के कारण कुछ गांवों में कटान हो रही है। जिसका ब्यौरा राजस्व कर्मियों से एकत्र कराया जा रहा है। पूरी स्थिति पर नजर भी रखी जा रही है।
- रामजीत मौर्य, एसडीएम कैसरगंज