बागपत। यमुना का जलस्तर खतरे के निशान 209 मीटर से ऊपर पहुंच गया है। इससे बागपत, काठा, निवाड़ा, खेड़ा हटाना, टांडा, कोताना में यमुना खादर में करीब 500 बीघा में सब्जी और चारे की फसल डूब गई है। हथिनीकुंड बैराज से लगातार पानी छोड़ा जा रहा है, जिससे यहां मंगलवार को पानी ओर बढ़ जाएगा।
पहाड़ों पर बारिश के कारण हथिनीकुंड बैराज से पिछले कई दिन से लगातार पानी छोड़ा जा रहा है, जबकि सोमवार सुबह तीन लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया। जिससे यमुना खादर में उगाई गई घीया, तोरई, सीताफल के साथ ही ज्वार व बाजरा की फसल डूब गई। किसानों के अनुसार करीब 500 बीघा में सब्जी व चारे की फसल डूब गई है। वहीं जिस तरह से लगातार पानी छोड़ा जा रहा है, उससे यमुना किनारे पर कटान हो रहा है। जिसके चलते टांडा, बदरखा, शबगा, जागोस, कोताना, खेड़ा इस्लामपुर, सुल्तानपुर हटाना, नैथला, फैजपुर निनाना, निवाड़ा, सिसाना, बागपत, काठा, पाली, साकरौद में परेशानी बढ़ने लगी है।
पक्का घाट के रास्ते पर बांध बनवाया, मकान खाली करने की सलाह
एसडीएम अनिकेत वर्मा, नायब तहसीलदार मोनिका यादव, अधिशासी अधिकारी राजेश राणा ने यमुना पक्का घाट का निरीक्षण किया। जहां यमुना में जाने वाले कच्चे रास्ते पर बांध बनवाया गया। इसके अलावा यमुना किनारे इस्लामाबाद काॅलोनी में बने मकानों के पास तक पानी आने के कारण लोगों को मकान खाली करके अन्य जगहों पर जाने की सलाह दी गई है। जिससे किसी तरह का हादसा नहीं हो सके।
बागपत में इन किसानों की डूबी फसल
यमुना का जलस्तर बढ़ने से बागपत के पक्का घाट के समीप यमुना खादर में खेती करने वाले किसान जयकिशन की 35 बीघा ज्वार व बाजरा, इशाक की 30 बीघा ज्वार व लोकी, हाजी इस्लाम की 35 बीघा में ज्वार, बिजेंद्र की 25 बीघा फसल चारा समेत अन्य किसानों की फसल डूब गई।
यमुना किनारे खेतों में 35 बीघा में ज्वार व बाजरा की फसल उगाई थी। फसल भी काफी अच्छी थी। लेकिन जलस्तर बढ़ने से फसल डूब गई है। फसल खराब हो जाएगी। - जयकिशन, किसान
यमुना नदी के किनारे 25 बीघा चारा की फसल डूब गई। पहले बारिश के कारण समस्या हो रही थी, अब यमुना में पानी ज्यादा आने के कारण फसल डूब गई। इससे काफी नुकसान हुआ है। - बिजेंद्र, किसान
यमुना का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है जो खतरे के निशान से 30 सेमी ऊपर चल रहा है। इसलिए बाढ़ चौकियों से नजर रखी जा रही है। फसल डूबने के मामले में मौके पर जाकर दिखवाया जाएगा। गांवों में बाढ़ का खतरा नहीं है। - नरेंद्र कुमार, सहायक अभियंता सिंचाई