बड़ौत। कुश्ती के अंतरराष्ट्रीय अखाड़े में दमदार पहलवानों के दम पर खुद को साबित करने वाले बड़ौत में अब सूबे का सबसे बड़ा रेसलिंग स्टेडियम बनकर तैयार हो गया है।
पूर्व केंद्रीय मंत्री अजित सिंह के प्रयास से एयरपोर्ट अॅथारिटी ने जेवी कॉलेज बड़ौत में निर्माण कराया। अॅथारिटी की टीम ने स्टेडियम सोमवार को कॉलेज के हैंडओवर कर दिया। अब कुश्ती की प्रतिभाओं को यहां अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएगी।
लोयन मलकपुर गांव के पहलवानों ने दुनिया में बागपत का नाम रोशन किया है। इस गांव के हिस्से में चार अर्जुन अवार्डी खिलाड़ी हैं। रियो ओलंपिक में इसी गांव का बेटा संदीप तोमर धाक जमाने पहुंचा है।
वर्ष 2013 तत्कालीन केंद्रीय उड्डयन मंत्री चौधरी अजित सिंह ने बड़ौत के जनता वैदिक महाविद्यालय मेें अंतरराष्ट्रीय स्तर का रेसलिंग स्टेडियम बनाने की घोषणा की थी।
एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने सर्वे कर इस पर स्टेडियम का निर्माण कार्य शुरू कर दिया था। साढ़े छह करोड़ रुपये की लागत से इंडोर स्टेडियम बनकर तैयार हो गया।
सोमवार को एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के जनरल मैनेजर अशोक कुमार वर्मा के नेतृत्व मेें जयंती प्रधान, केसी मीना, एजीएम एचसी पंथ, सिविल मैनेजर संदीप कुमार कॉलेज पहुंचे।
कॉलेज प्रबंध समिति के अध्यक्ष वीरेंद्र पाल सिंह लौहड्डा, प्राचार्य डॉ. नरेंद्र सिंह, कार्यालय अधीक्षक मदन पाल, सौदान सिंह से बात की और स्टेडियम को प्रबंध समिति के हैंडओवर कर दिया। प्राचार्य डॉ नरेंद्र सिंह ने इसकी पुष्टि की है।
आधुनिक सुविधाएं, पांच हजार क्षमता
रेसलिंग स्टेडियम में पांच हजार दर्शकों की बैठने की सुविधा होगी। एक साथ दो मैट पर कुश्ती का आयोजन कर सकते हैं। प्राचार्य डॉ. नरेंद्र सिंह ने बताया आधुनिक गद्दों समेत स्टेडियम में आधुनिक सुविधाएं हैं।
इस तरह के मैट अभी यूपी के किसी स्टेडियम के पास नहीं है। स्टेडियम की छत मेें जर्मनी से मंगाई गई टेंजाइल फैबरिक का प्रयोग किया है। इसके अलावा टॉवर एसी के माध्यम से पूरे स्टेडियम को गर्मी और खेलों के दौरान कूल रखने की व्यवस्था की जाएगी।
कॉलेज के प्राचार्य डॉ. नरेंद्र सिंह और प्रबंध समिति के अध्यक्ष वीरेंद्र पाल सिंह लौहड्डा बताते हैं कि ऐसा कुश्ती का स्टेडियम फिलहाल दिल्ली में भी नहीं है। यह यूपी का सबसे बड़ा रेसलिंग स्टेडियम है। स्टेडियम पूर्ण रूप से तैयार हो चुका है।
स्पोर्ट्स अॅथारिटी से मांगा जाएगा कोच
प्राचार्य डॉ. नरेंद्र सिंह बताते हैं कि इसके लिए स्पोर्ट्र्स अॅथारिटी ऑफ इंडिया को पत्र लिखकर कोच मांगा गया है, ताकि खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण मिल सके। अगर वह कोई प्रबंध नहीं करते तो कॉलेज खुद ही इंतजाम करेगा।