बागपत। चैत्र नवरात्र के आठवें दिन शनिवार को घरों और मंदिरों में माता के आठवें स्वरूप मां महागौरी की पूजा-अर्चना की गई। महिलाओं ने घरों में अष्टमी का पूजन कराकर कन्याओं को भोजन कराया और व्रत पूरा किया। मंदिरों में दोपहर में भजन-कीर्तन कर माता का गुणगान किया।
जानकीदास मंदिर के मुख्य पुजारी ज्योतिषाचार्य राजकुमार शास्त्री ने बताया कि शनिवार को मां के आठवें स्वरूप महागौरी की पूजा-अर्चना की गई। महागौरी के तेज से ही संपूर्ण विश्व प्रकाशमान होता है। इनकी पूजा करने से सौभाग्य की प्राप्ति होती है और पापों का नाश हो जाता है। माता महागौरी वृषभ की सवारी करती हैं। मां गौरी अपने भक्तों को बल, बुद्धि देने के साथ-साथ नकारात्मकता को दूर करती है। शनिवार को मां को पंचामृत से स्नान कराकर गुड़हल का फूल, रोली, कुमकुम, अक्षत, सिंदूर, पान, सुपारी, धूप, दीप, लौंग का जोड़ा, इलायची, बताशा अर्पित कर पूजा-अर्चना की गई। दुर्गा सप्तशती का पाठ करके प्रसाद वितरित किया गया। दोपहर में मंदिर में महिला कीर्तन हुआ। इसमें महिलाओं ने मां गुणगान किया। इसके अतिरिक्त दुर्गा अष्टमी पर श्रद्धालुओं ने मां पूजा-अर्चना के बाद कन्याओं को भोजन कराकर नवरात्र के व्रत खोले। कुछ श्रद्धालु रविवार को नवमी पर कन्याओं को भोजन कराकर व्रत खोलेंगे।