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बिनौली। बरनावा के श्री चंद्रप्रभु दिगंबर जैन मंदिर में चल रहे 41 दिवसीय शांति विधान व दशलक्षण पर्व के दूसरे दिन बुधवार को श्रद्धालुओं ने उत्तम मार्दव धर्म की पूजा अर्चना की। इस अवसर पर विधान में पंडित महेश शास्त्री ने कहा कि अहंकार का त्याग करना ही उत्तम मार्दव धर्म कहलाता है। उन्होंने कहा कि अहंकार की दीवार मनुष्य को स्वयं के भीतर जाने नहीं देती। अहंकार के कारण विवाद होते हैं, वैमनस्यता, संप्रदाय व संघर्ष तक हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि मन को मारना ही मार्दव को स्वीकार करना है। अहम की मृत्यु ही सत्य का जीवन है। पूजा में बादामी जैन, लता जैन, नमन जैन, मुकेश जैन, विशांत जैन, सचिन जैन उपस्थित रहे। उधर, बिनौली के श्री दिगंबर जैन पुराना मंदिर, सकल समाज बड़ा मंदिर में भी दशलक्षण पर्व के दूसरे पंडित दिनेश जैन काशलीवाल के निर्देशन में जैन समाज के लोगों ने श्रद्धाभाव के साथ उत्तम मार्दव धर्म की पूजा अर्चना की। रात्रि में मंदिर में भजन संध्या, आरती हुई। वहीं बच्चों ने एक से बढ़कर एक सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। यहां पर मदन जैन, प्रमोद जैन, नीरज जैन मौजूर रहे।
मुकेश पंवार