नाव हादसे के बाद काठा गांव में तीसरे दिन भी लोगों की आवाजाही लगी रही। राष्ट्रीय अनुसूचित जाति/ जन जाति आयोग के पूर्व अध्यक्ष और राज्यसभा सदस्य पीएल पूनिया के नेतृत्व में कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल ने पीड़ितों का दर्द जाना।
रालोद के विधायक सहेंद्र सिंह रमाला भी पीड़ितों से मिले और भरोसा दिलाया ग्रामीणों को इंसाफ दिलाया जाएगा। उन्होंने कहा पीड़ितों पर ही लाठीचार्ज और फिर केस में नामजदगी गलत है। इसके अलावा अन्य कई राजनीतिक और सामाजिक संगठनों के पदाधिकारी भी गांव में पहुंचे।
शनिवार को कांग्रेस का सात सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल काठा गांव में पहुंचा। राज्यसभा सदस्य पीएल पूनिया, कांग्रेस प्रवक्ता राशिद अलवी, पूर्व सांसद बिजेंद्र सिंह, पूर्व मंत्री सतीश शर्मा, कांग्रेस कमेटी के राष्ट्रीय सचिव नसीब सिंह, यूपी इकाई के महामंत्री राजेंद्र अवाना और सचिव संजीव शर्मा शामिल रहे।
कांग्रेस कमेटी के जिलाध्यक्ष राम कुमार चौधरी के साथ प्रतिनिधिमंडल के सदस्य हादसे में मारे गए लोगों के परिजनों से मिले। हादसे के कारण पूछे। लाठीचार्ज की निंदा कर कहा केस में नामजदगी वापस नहीं ली गई तो आंदोलन किया जाएगा। उन्होंने कहा कांग्रेस किसान और मजदूरों पर अत्याचार नहीं होने देगी।
कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल ने दलित बस्ती में जाकर पीड़ितों का हाल जाना। प्रतिनिधिमंडल ने कहा वह अपनी रिपोर्ट राष्ट्रीय नेतृत्व को देंगे, इसके बाद पीएम नरेंद्र मोदी से मिलकर न्याय की मांग होगी। उनके साथ कांग्रेस कमेटी के शहर अध्यक्ष राकेश शर्मा सहित शिव कुमार कटारिया, बृजपाल सिंह, मोहन उपाध्याय, जगदीश आदि भी मौजूद रहे।
छपरौली के रालोद विधायक सहेंद्र सिंह रमाला शनिवार को दोपहर बाद गांव में पहुंचे। उन्होंने पीड़ित परिवार को भरोसा दिलाया रालोद उनकी लड़ाई को लड़ेगा। पीड़ितों के खिलाफ ही दर्ज मुकदमे वापस होने चाहिए। यह बेहद गलत है।
इस मौके पर रालोद के जिलाध्यक्ष ठाकुर प्रदीप सिंह, शहर अध्यक्ष भूरे सभासद ओमवीर ढाका, प्रदीप आदि मौजूद रहे। सपा नेता ओमवीर तोमर ने भी पीड़ित परिवारों से मुलाकात की। इनके साथ सीताराम तोमर, महेंद्र सिंह, राजेंद्र सिंह, सुरेंद्र गुराना आदि शामिल रहे और सरकार से पीड़ित परिवार के सदस्यों को बीस लाख रुपये का मुआवजा देने की मांग की।
जाट महासभा की नेता डॉ. शालिनी राकेश ने भी काठा गांव में पहुंचकर पीड़ित परिवारों से बातचीत की। इसके अलावा कर्तव्य राष्ट्रीय पार्टी के पदाधिकारी भी गांव में पहुंचे। पार्टी की अध्यक्ष किरण जाटव ने पीड़ित परिवारों से मुलाकात की।
उनके साथ सीपी सिंह, गौतम बुद्ध, विजय सिंह आदि मौजूद रहे। उन्होंने एडीएम लोकपाल सिंह को ज्ञापन देकर पीड़ित परिवारों के लिए 25 लाख रुपये मुआवजा और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग रखी।
संसद में देना पड़ेगा लाठियों का हिसाब : पूनिया
राष्ट्रीय अनुसूचित आयोग के पूर्व अध्यक्ष एवं राज्यसभा सदस्य पीएल पूनिया ने कहा काठा नाव हादसे को संसद में उठाया जाएगा। किसान-मजदूरों पर बरसाई लाठी का हिसाब देश की सबसे बड़ी पंचायत में मांगा जाएगी। सीएम योगी आदित्य नाथ गोरखपुर में उलझे हैं, उन्हें काठा आकर अपनी सरकार की हकीकत देखनी चाहिए।
काठा गांव में पत्रकारों से बातचीत कर उन्होंने कहा हादसे के पीड़ितों पर लाठीचार्ज करना शर्मनाक है। यूपी सरकार और सीएम योगी आदित्य नाथ को शर्म आनी चाहिए। सीएम को यहां सबसे पहले आना चाहिए था। कृषि बीमे की राशि से किसान-मजदूरों को राहत देकर सरकार वाहवाही लूटना चाहती है।
संसद के बाहर और भीतर कांग्रेस इस पर सरकार से जवाब मांगेंगी। उन्होंने कहा काठा हादसे को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री से मुलाकात की जाएगी। जांच होनी ही चाहिए कि हादसे का जिम्मेदार कौन है। पीड़ित परिवारों को 20-20 लाख की मदद दी जाए। उन्होंने कहा कांग्रेस काठा में हुए अत्याचार पर चुप बैठने वाली नहीं है।
पुलिस पर भरोसा नहीं, न्यायिक जांच हो
पूर्व सांसद और कांग्रेस के प्रवक्ता राशिद अलवी ने कहा पुलिस पर भरोसा नहीं हैं। काठा के लोगों को न्याय दिलाने के लिए न्यायिक जांच होनी चाहिए। जिस वक्त लाठीचार्ज किया गया, उस समय केंद्रीय मंत्री और भाजपा के विधायक गांव में ही मौजूद थे। आखिर ऐसी कौन सी मजबूरी थी कि पुलिस को लाचार लोगों पर लाठी चलानी पड़ी।
काठा गांव में पत्रकारों से बातचीत में अलवी ने कहा न्यायिक जांच से ही दूध का दूध और पानी का पानी होगी। पुलिस पर लोगों को भरोसा नहीं है। दिल्ली - सहारनपुर हाईवे पर जिस वक्त लाठीचार्ज किया जा रहा था, उस समय केंद्रीय मंत्री यमुना किनारे पर ही मौजूद थे। इसके अलावा स्थानीय विधायक भी थे। फिर भी स्थानीय पुलिस ने ऐसी हरकत की।
भाजपा सरकार ने अब तक इस पर सख्त कदम नहीं उठाया है। उन्होंने कहा कि जबरन लाश उठाने की कोशिश कर रहे पुलिसकर्मियों पर अब तक क्यों कार्रवाई नहीं की गई है। पुलिस-प्रशासन के जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए। ग्रामीणों को न्याय दिलाने के लिए संघर्ष किया जाएगा।