बागपत। जिले के आयुर्वेदिक अस्पतालों में पिछले कई साल से चिकित्सक और स्टॉफ की नियुक्ति नहीं हुई है। अधिकांश अस्पताल फार्मासिस्ट के सहारे चल रहे हैं।
जिले में आठ आयुर्वेदिक एवं यूनानी अस्पताल में छह चिकित्सक और चार फार्मासिस्ट के पद खाली हैं। चिकित्सकों की कमी के कारण एक चिकित्सक तीन दिन एक अस्पताल में और तीन दिन एक अस्पताल में मरीजों की जांच करता है, जबकि दो अस्पताल में तो फार्मासिस्ट पर ही लोगों के इलाज की जिम्मेदारी है।
ये है स्थिति
जिले में आठ आयुर्वेदिक अस्पताल हैं। बागपत जिला मुख्यालय के अलावा खेकड़ा, मलकपुर, पूरनपुर, अमीनगर सराय, ख्वाजा नंगला, बड़ौत, बिनौली में आयुर्वेदिक अस्पताल है। आयुर्वेदिक अस्पताल में एक-एक और जिला स्तर पर चिकित्सक के दो पद हैं। एक अस्पताल में एक फार्मासिस्ट का पद हैं। आठ आयुर्वेदिक अस्पताल में तीन चिकित्सक तैनात हैं, और छह और फार्मासिस्ट के चार पद रिक्त हैं।
एक चिकित्सक पर दो अस्पताल की जिम्मेदारी
- चिकित्सकों की कमी के कारण एक चिकित्सक पर दो-दो अस्पताल की जिम्मेदारी है। चिकित्सक तीन दिन एक अस्पताल और तीन दिन दूसरे अस्पताल में लोगों की जांच कर इलाज करते है।
फार्मासिस्ट के सहारे दो अस्पताल
- मलकपुर और खेकड़ा में चार-चार बेड के आयुर्वेदिक अस्पताल है। दोनों अस्पताल में लगभग दो साल से एक भी चिकित्सक नहीं है। दोनों अस्पताल में फार्मासिस्ट पर लोगों के इलाज की जिम्मेदारी है।
मुख्यालय पर नहीं एक भी चिकित्सक
- जिला मुख्यालय पर आयुर्वेदिक अस्पताल में चिकित्सक के दोनों पद रिक्त हैं। अस्पताल में जिला आयुर्वेदिक एवं यूनानी क्षेत्रीय अधिकारी और फार्मासिस्ट ही लोगों के इलाज की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।
शासन को भेजी मांग
- विभाग की ओर से शासन से चिकित्सक और फार्मासिस्ट की तैनाती की मांग भेजी गई है। चिकित्सकों के अभाव में दो अस्पताल में फार्मासिस्ट जबकि तीन चिकित्सक छह अस्पताल की जिम्मेदारी संभाल रहे है। - डॉ. मोनिका गुप्ता, आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी