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विनीता ने छपरौली के स्कूल को बनाया मंदिर

Thu, 08 Feb 2018 01:14 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बागपत
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प्राथमिक विद्यालय में पेंटिंग करती अध्यापक। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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प्राइमरी स्कूलों की चौपट होती शिक्षा व्यवस्था और खंडहर बनते भवनों के बीच छपरौली का प्राथमिक स्कूल संख्या - तीन उम्मीद की नई किरण बन गया है। स्कूल की सजावट किसी अंग्रेजी माध्यम के स्कूल जैसी है।
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दीवारों से लेकर कमरों तक में दीवारें आकर्षक चित्रकारी से सजी हैं। खास बात यह है कि प्रधानाध्यापक विनीता तोमर ने खुद ही ब्रश उठाकर अपनी कला के हुनर से मॉडल स्कूल के रंग में रंग दिया है।

छपरौली का प्राथमिक स्कूल संख्या - तीन वर्तमान समय में प्राइमरी स्कूलों के  शिक्षकों के लिए नजीर बन गया है। स्कूल में प्रवेश करते ही इसके खास होने का खुद अहसास होता है। स्कूल की चहारदीवारी बेहद आकर्षक तरीके से सजाई गई है।
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बच्चों के लिए प्रेरणादायी और आकर्षक चित्र उकेरे गए हैं। कमरे और रसोई के अलावा स्कूल हर हिस्से पर आकर्षक वॉल पेंटिंग नजर आती है। यह किसी पेंटर का नहीं, बल्कि इसी स्कूल की कार्यवाहक प्रधानाध्यापक विनीता तोमर का कमाल है।

वह बताती हैं कि स्कूल की वॉल पेंटिंग के लिए पेंटर बुलाया, काम शुरू भी कराया, लेकिन पेंटर का खर्च बजट से कहीं ज्यादा था। पढ़ाई के दौरान वह खुद कला की छात्रा रही । एक दीवार का चयन कर खुद ही पेंटिंग बनाने का प्रयास किया, सफलता मिली तो फिर कदम नहीं रुके।

स्कूल के हर हिस्से पर पेंटिंग की। इसके लिए उसके परिवार ने पूरा सहयोग किया। स्कूल की छुट्टी के बाद भी विनीता ने पेंटिंग की, परिवार के सदस्य भी अभियान में सहयोग करने के लिए स्कूल पहुंचे। कार्य पूरा हो चुका है और वह बेहद सुकून में है। बच्चे खुश हैं और लोगों ने प्रशंसा की।

जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी योगराज सिंह ने कहा प्रधानाध्यापक का बेहतर प्रयास है। छपरौली का स्कूल अन्य स्कूलों के लिए भी प्रेरणा हैं। शिक्षक अपने-अपने स्कूलों को अगर बेहतर बनाने का प्रयास करें तो शिक्षा का स्तर सुधर सकता है।

स्कूल में 142 बच्चे पा रहे हैं शिक्षा
बागपत। प्राथमिक विद्यालय संख्या तीन में 142 बच्चे पढ़ रहे हैं। इनमें 72 बालक और 69 बालिकाएं है। विनीता तोमर इन बच्चों के लिए भी किसी प्रेरणा से कम नहीं है। 

शिक्षा से निखरती है प्रतिभा
बागपत। शिक्षिका विनीता तोमर कहती हैं कि शिक्षा से प्रतिभा निखरती है। तीन विषयों से एमए और बीएड कर वह वर्ष 2009 में शिक्षक बनीं । मूल रूप से बावली गांव की रहने वाली हैं। पति भी प्राइमरी स्कूल में शिक्षक हैं। उनका स्कूल किसी से कम नहीं है, बस बेहतर प्रयास करने की आवश्यकता है। ब्यूरो
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