बाघू गांव में हमले में घायल हुए किसान महेश सिंह (48) की दिल्ली अस्पताल में सोमवार सुबह उपचार के दौरान मौत हो गई। इसके बाद परिजन और गांव के लोग शव लेकर कोतवाली पहुंच गए।
उन्होंने पुलिस पर हमला करने के तीन आरोपियों को गिरफ्तार न करने का आरोप लगाते हुए पहले कोतवाली, फिर एसपी दफ्तर पर जमकर हंगामा किया। इस दौरान उन्होंने पुलिस को जमकर खरी-खोटी भी सुनाई।
बाघू गांव के किसान महेश और उनके बेटे सत्तू पर 12 मार्च को जानलेवा हमला कर दिया गया था। महेश गंभीर रूप से घायल हो गया था। इस मामले में कोतवाली में गांव के पूर्व प्रधान तेजी, उसके बेटे सोनू के अलावा नीरज और गौरव के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज हुई थी। पुलिस ने आरोपी नीरज को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। अन्य आरोपी फरार चल रहे हैं।
उधर, घायल महेश का दिल्ली के जीटीबी अस्पताल में उपचार चल रहा था, लेकिन उसकी हालत में सुधार नहीं हुआ। सोमवार सुबह करीब सात बजे उसकी मौत हो गई। परिवार में कोहराम मच गया। हमले के तीन आरोपियों की गिरफ्तार न होने से गुस्साए परिजन और गांव के लोग महेश के शव को लेकर अस्पताल से सीधे कोतवाली पहुंचे।
उनका आरोप है कि पुलिस की आरोपियों से मिलीभगत है। इसलिए पुलिस आरोपियों को गिरफ्तार नहीं कर रही है। आरोपी खुलेआम गांव में घूम रहे हैं और समझौते का दबाव बना रहे हैं। इसको लेकर उन्होंने पहले कोतवाली, फिर एसपी दफ्तर पर पहुुंचकर जमकर नारेबाजी कर हंगामा किया। उन्होंने पुलिस अफसरों को जमकर खरी-खोटी सुनाई।
सीओ कर्मवीर सिंह, कोतवाली प्रभारी मुकेश कुमार और सपा नेता बिल्लू प्रधान ने उन्हें समझाकर शांत किया। इस दौरान पीड़ितों ने एएसपी से शिकायत की है। एएसपी अजीजुल हक का कहना है कि महेश के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर केस को तरमीम कर लिया जाएगा। आरोपियों की गिरफ्तारी को ताबड़तोड़ दबिश दी जा रही है।
जमानत पर जेल से छूटा आरोपी
बागपत। किसान महेश के भाई महावीर का कहना है कि पुलिस ने चार आरोपियों में से एक आरोपी नीरज को ही गिरफ्तार कर जेल भेजा था। वह जमानत पर जेल से बाहर आ गया है।