55 बसों को सड़कों पर उतार दिया गया, मगर बाकी बसें डिपो में खड़ी धूल फांक रही हैं। डिपो में करीब 66 चालक और 110 परिचालकों की कमी बनी हुई है। इसी वजह से सभी नई बसों का संचालन नहीं हो पा रहा है और बसें डिपो में खड़ी हैं। चालक-परिचालकों की कमी दूर करने के लिए बड़ौत डिपो में हर बुधवार को भर्ती प्रक्रिया चल रही है। स्टाफ की कमी दूर होगी तो यह बसें सड़कों पर उतर सकेंगी।
हर महीने लाखों के टैक्स का बोझ पड़ रहा
विभागीय अधिकारियों के अनुसार रोडवेज विभाग को प्रति सीट 147 रुपये के हिसाब से मासिक टैक्स जमा करना पड़ता है। एक बस में औसतन 52 सीटें होने पर प्रति बस 7,644 रुपये मासिक टैक्स बनता है। इस तरह बड़ौत डिपो पर खड़ी बसों पर हर महीने लगभग 2.29 लाख रुपये टैक्स का भुगतान किया जा रहा है।
इन रूटों पर नहीं हो रहा बसों का संचालन
-बड़ौत-दिल्ली-अलवर रूट
-बड़ौत-हरदोई रूट
-बड़ौत-कानपुर रूट
-बड़ौत-दिल्ली-लखनऊ रूट
नोट: इनके अलावा स्थानीय रूटों पर काफी बसों की कमी चल रही है।
हम जब बड़ौत जाते हैं तो बस का घंटों तक इंतजार करते हैं, लेकिन समय पर बस नहीं मिलती। देर होने से काम प्रभावित होता है। नई बसें चल जाएं तो राहत मिलेगी। -सुधीर, ख्वाजा नंगला
डिपो में बसें खड़ी रहती हैं, लेकिन रूट पर नहीं मिलती हैं। भीड़ के कारण सफर मुश्किल हो गया है। व्यवस्था सुधारनी चाहिए। -राकेश विश्वकर्मा, बड़ौत
ये बोले अधिकारी
चालक-परिचालकों की कमी की वजह से नई बसें डिपो में खड़ी हैं। इस कारण कई रूटों पर बसों का संचालन भी बंद है। स्टाफ की कमी को पूरा कराने के लिए लगातार धरना-प्रदर्शन किया जा रहा है। अधिकारियों को भी ज्ञापन भेजे जा रहे हैं। स्टाफ की कमी जल्द दूर होनी चाहिए, जिससे कर्मियों व यात्रियों दोनों को फायदा होगा। -संजीव मलिक, शाखा अध्यक्ष रोडवेज कर्मचारी संयुक्त परिषद संघ बागपत।
चालक-परिचालकों की कमी के कारण कुछ बसें संचालन में नहीं आ पा रही हैं। भर्ती प्रक्रिया लगातार जारी है और प्रयास है कि सभी बसों का अधिकतम उपयोग कर यात्रियों को बेहतर सुविधा दी जा सके। -प्रमोद कुमार, बस संचालन प्रभारी, बड़ौत डिपो