बागपत में रेत खनन ने न सिर्फ यमुना की धारा के रुख को ही मोड़ा है, बल्कि रेत से भरे ओवरलोड ट्रकों ने सड़कों को सूरत भी बदल दी है। कई आंदोलनों के बाद मुश्किल से बनी हाईवे की सड़क फिर से उखड़नी शुरू हो गई है। गहरे-गहरे गड्ढे हो चुके हैं। हालांकि अधिकारियों ने इस ओर से पूरी तरह आंखें बंद कर लीं हैं।
हाईवे की मरम्मत के लिए बड़ौत से लेकर खेकड़ा तक लोगों ने जमकर आंदोलन किया, हंगामा किया, धरना प्रदर्शन हुए, तब जाकर इस सड़क की मरम्मत हो सकी। रेत खनन जैसे ही शुरू हुआ, सड़क की हालत खराब होने लगी। रेत के ओवरलोड ट्रकों का दबाव इतना अधिक हुआ कि सड़कें सह नहीं पाईं।
चंद दिनों में ही सड़क कुचल गई। सड़क में गहरे-गहरे गड्ढे हो गए, रेत के ओवरलोड ट्रकों के अलावा उनसे गिर रहे पानी ने तो सड़क की मुश्किल से हुई मरम्मत पर पानी ही फेर दिया। सिर्फ बागपत से गौरीपुर मोड़ तक ही इतने अधिक गड्ढे हो गए कि यह भी पता नहीं चल पा रहा कि इस सड़क की मरम्मत हुई हो।
निवाड़ा खादर में हो रहे रेत के अंधाधुंध खनन द्वारा ट्रकों को रेत से भरकर ट्रकों को सड़क पर ही खड़ा किया जा रहा है। ट्रकों से पानी गिरकर सड़कों पर फैल रहा है और सड़कें उखड़ रहीं हैं। ताज्जुब इस बात का है कि कुछ दिन पूर्व ही अधिकारियों की बैठक में डीएम ने ओवरलोड वाहनों पर अंकुश लगाने के निर्देश दिए थे।
हालांकि रेत के ट्रकों के मामले में सभी चुप्पी साधे हुए हैं। लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता बालेंद्र का कहना है कि काली सड़क पर पानी काफी नुकसानदायक है। भीगी सड़कों पर ओवरलोड ट्रक नुकसान पहुंचा रहे हैं। सड़कों पर गड्ढों का कारण सड़क भीग जाने एवं ओवरलोड ट्रक हैं।