आजादी के बलिदानी पन्नों पर बसौद गांव की गाथा अमिट है। अंग्रेजी फौज के साथ लड़ते हुए पूरे गांव ने शहादत दी थी। गांव में तोप लगाकर गौरों ने नरसंहार किया 10 घंटे के संघर्ष में जिंदा बचे 15 लोगों को फांसी पर लटका दिया गया था। शहीदों की याद में शनिवार को यहां मशाल जुलूस निकालकर श्रद्धासुमन अर्पित किए जाएंगे।
अंग्रेजों से मुकाबले के लिए क्रांतिवीरों को जिले के बसौद गांव से रसद सप्लाई किया जाता था। क्रांति गांव बसौद युवा चेतना मंच के संस्थापक अध्यक्ष मास्टर सत्तार बताते हैं कि अंग्रेजों को इसकी भनक लगते ही 16 जुलाई 1857 को मेरठ से अंग्रेजी फौज बसौद के लिए रवाना कर दी गई। गौरी पलटन के डालूहेड़ा पहुंचते ही ग्रामीणों को इसकी भनक लग गई। ग्रामीणों ने मुकाबले की तैयारी की। बच्चों और महिलाओं को जंगल में छिपा दिया गया।
17 जुलाई 1857 को यहां गोरी पलटन ने हमला कर दिया। सीधा मुकाबला हुआ। सैकड़ों ग्रामीणों ने शहादत दी। अंग्रेज भी मारे गए। जिस वक्त गोरी पलटन गांव से निकलने लगी ग्रामीणों ने यहां दोबारा से पलटन पर हमला कर दिया। दो राउंड में करीब दस घंटे संघर्ष हुआ। गोरों ने 15 लोग जिंदा पकड़े, जिन्हें पेड़ पर लटकाकर फांसी दे दी गई। क्रांति गांव बसौद की शहादत 160 बरस बाद भी लोगों की जुबान पर है।
क्रांतिवीरों की याद में शनिवार को गांव में मशाल जुलूस निकाला जाएगा। मास्टर सत्तार ने बताया कि बिलौचपुरा, जौहड़ी के बाद मुख्य अतिथि इंद्रेश शाम के समय बसौद पहुंचेंगे। गांव के क्रांति स्थल से मशाल जुलूस निकाला जाएगा।
18 को जुटेंगे इतिहासकार
बागपत। बसौद को महा क्रांति ग्राम घोषित किए जाने की कवायद चल रही है। 18 जुलाई को यहां कईं इतिहासकार जुटेंगे। ग्रामीणों के बीच गांव को महाक्रांति ग्राम की उपाधि दी जाएगी।
सीधे संवाद करेंगे दिल्ली के सीएम
अग्रवाल मंडी टटीरी। बली गांव में आम आदमी पार्टी की बैठक हुई। जिला संयोजक ओमबीर सिंह ने कहा 17 जुलाई से दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ताल ठोक कार्यक्रम के माध्यम से दुनियाभर के लोगों के साथ सीधे संवाद करेंगे। बैठक में सोहनपाल शर्मा, नौसाद अली, संसार सिंह, संजीव, राजू सैनी, डॉक्टर सतीश चंद, पवन शुक्ला, वीरेंद्र आर्य, सुधीर धामा, खलील अहमद, सतीश गुर्जर, अमित गर्जर, महेंद्र सिंह, प्रशांत वर्मा मौजूद रहे।