दोघट। हिम्मतपुर गांव में कोई प्राइमरी विद्यालय नहीं है। गांव के छात्र-छात्राओं को पढ़ाई के सूजती गांव के स्कूल में जाना पड़ता है। गांव में 2014 में लखनऊ की टीम ने स्कूल खोलने के लिए सर्वे किया था, मगर आठ साल बीतने के बाद भी गांव में स्कूल नहीं खोला गया है, जिससे गांव के छोटे-छोटे बच्चों को दूसरे गांव जाना पड़ता है। ग्रामीणों ने गांव में स्कूल खुलवाने की मांग की है।
चौगामा क्षेत्र के हिम्मतपुर गांव में प्राथमिक विद्यालय नहीं है। विद्यालय के अभाव में गांव के सौ से अधिक छात्र-छात्राओं को गांव के लगभग एक किमी दूर सूजती गांव में पढ़ाई के लिए जाना पड़ता है। गांव के लोगों का कहना है कि 2010 से गांव में विद्यालय खुलवाने की मांग की जा रही है। ग्रामीणों की मांग पर 2014 में लखनऊ से गांव पहुंची टीम ने सर्वे किया था। सर्वे के आठ साल भी हालात जस के तस हैं।
पूर्व प्रधान किरथपाल सिंह का कहना है कि गांव से प्राइमरी स्कूल लगभग एक किमी है। 2010 से प्रयास के और 2014 में हुए सर्वे के आठ साल बाद भी गांव में स्कूल शुरू करने के लिए कोई कार्रवाई नहीं हुई है। राजपाल ने बताया कि गांव में स्कूल न होने के कारण बच्चों को गांव से दूर पढ़ाई करने के लिए भेजना पड़ता है। जिससे बच्चों को स्कूल आने-जाने में परेशानी होती है।
देवेंद्र राठी ने बताया कि जिले से शासन स्तर तक गांव में स्कूल खोलने की मांग की जा चुकी है, मगर समस्या का समाधान नहीं हो पाया है, जिससे गांव के बच्चों को परेशानी उठानी पड़ रही है। सत्येंद्र राठी ने कहा कि स्कूल दूर होने के कारण बच्चों को स्कूल भेजते हुए डर लगा रहता है। गांव के छोटे-छोटे बच्चों को स्कूल आने-जाने में परेशानी होती है।
कोट...
- शासन की गाइडलाइन के अनुसार एक किमी के दायरे में प्राथमिक और तीन किमी में उच्च प्राथमिक विद्यालय का प्रावधान है। स्कूल के लिए जल्द ही निरीक्षण कर आगे की कार्रवाई की जाएगी। - बिजेंद्र बालियान, खंड शिक्षाधिकारी बिनौली