जमाअत इस्लामी हिंद के मुस्लिम पर्सनल लॉ जागरूकता अभियान के तहत शहर में संगठन के पदाधिकारियों ने तीन तलाक पर मंथन किया। मंडल अध्यक्ष डॉ. सलीमुद्दीन ने कहा मुस्लिमों का एक बड़ा वर्ग नहीं जानता कि तीन तलाक क्या है। अब लोगों को समझना होगा, सिर्फ तीन बार बोल देना ही तीन तलाक नहीं है। गर्ल्स इस्लामिक आर्गेनाइजेशन की अंजुम निशा ने कहा यदि तीन तलाक खत्म ही कर दिया जाए, तो बेहतर रहेगा।
रविवार को मुगलपुरा स्थित बारात घर में शहर की मुस्लिम समाज की महिलाओं को तीन तलाक पर जागरूक किया। इसमें अंजुम निशा ने कहा इस्लाम को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है। शरीयत के कानून लोगों की भलाई के लिए हैं। लोगों की भलाई सिर्फ इसमें है कि शरीयत का पालन किया जाना चाहिए। शरीयत में सिर्फ एक तलाक का जिक्र है, तीन तलाक की कोई गुंजाइश नहीं है।
तीन तलाक का जिक्र करके बार-बार भ्रम फैलाया जा रहा है। उन्होंने कहा मुस्लिम महिलाएं ज्यादा से ज्यादा शरीयत के विषय में जानें। समाज में जो गलत फहमियां फैलाई जा रही हैं, उन्हें दूर किया जाना चाहिए। अगर कोई गलत बात फैलाता है, तो चट्टान की तरह विरोध में खड़े हो।
डॉ, सलीमुद्दीन ने कहा मुस्लिम समाज का एक बड़ा तबका ऐसा है, जो तीन तलाक के विषय में कुछ नहीं जानता। उन्होंने कहा तीन तलाक की एक प्रक्रिया है, वह सिर्फ एक बार एक दो तीन बोलने से नहीं होता। उसके लिए शरीयत में समय और प्रक्रिया है। इसमें महरूनिशां, केसर जहां, अरशद खां, नसीमा बेगम, नसरीन, शबनम, जैबून, मास्टर अरशद खान, इरशाद खान, कोहिनूर, शफीक सलमानी आदि रहे।
फिजूलखर्ची पर लगे रोक
बागपत। समाज के लोगों को बुराई दूर करने के लिए कहा। वक्ताओं ने कहा कि फिजुलखर्ची से दूर रहें। शादी-विवाह में ज्यादा खर्च नहीं करना चाहिए। नेक राह पर चलना चाहिए।