बागपत। प्राइवेट स्कूलों को कोरोना काल की 15 प्रतिशत फीस वापस करने या समायोजन करने का फैसला हाईकोर्ट ने सुनाया था। जिस पर अब सुप्रीम कोर्ट ने स्कूल संचालकों से बैलेंस सीट मांगी है, जिससे उसके आधार पर फीस वापसी को लेकर फैसला दिए जाने की बात कही जा रही है।
इस पर अभिभावक और स्कूल संचालक दोनों संतुष्ट है। अभिभावकों का मानना है कि स्कूलों की बैलेंस सीट दिखाने से पूरी स्थिति साफ हो जाएगी। उसके बाद फीस वापसी के आदेश को लागू कराया जाना चाहिए। वहीं स्कूल संचालकों ने कोरोना काल में 50 प्रतिशत फीस नहीं मिलने की बात कही है।
- स्कूलों में बच्चों की फीस समायोजन और वापस करने के लिए कोर्ट का जो भी फैसला है, उसे लागू कराया जाना चाहिए। स्कूलों को अपनी बैलेंस शीट कोर्ट में जमा करनी चाहिए। - कुलदीप चौहान, अभिभावक
- कोरोना काल में स्कूल बंद रहे और बच्चों ने घर पर रहकर ऑनलाइन पढ़ाई की। स्कूल संचालकों को बच्चों की फीस का समायोजन करना चाहिए। - चंद्रदत्त शर्मा, अभिभावक
- आर्थिक रूप से कमजोर अभिभावकों के बच्चों की फीस माफ करने से कोई परहेज नहीं है। मगर अधिकांश अभिभावक संपन्न होने के बावजूद भी स्कूल की फीस जमा नहीं कर रहे है। इस बारे में भी सरकार को कोई कदम उठाना चाहिए। - प्रवेंद्र खोखर, अध्यक्ष प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन
- कोरोना काल में अधिकतर अभिभावकों ने बच्चों की फीस जमा नहीं कराई है। फीस नहीं मिलने के कारण स्कूल संचालक अभी तक परेशानी झेल रहे है। जब स्कूलों में फीस ही जमा नहीं हुई है तो वापस कहा कैसे की जाएगी। - जोनी शर्मा, सदस्य प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन