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Baghpat News: गांव में मुनादी कराकर ढूंढे गए बीमार

Mon, 27 Mar 2023 12:32 AM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बागपत
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बागपत। फैजपुर निनाना में प्रसाद की खिचड़ी खाने के बाद बच्चों समेत अन्य कई लोगों की तबीयत बिगड़ने पर पूरा सरकारी अमला गांव में पहुंच गया। रात में कई बार मुनादी कराकर उनको ढूंढा गया, जिन्होंने प्रसाद की खिचड़ी खाई थी। जिससे यह पता लगाया जा सके कि किसी की हालत तो नहीं बिगड़ रही है।
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गांव से जिस किसी ने खिचड़ी खाई थी, उनमें ज्यादातर की धीरे-धीरे तबीयत बिगड़नी शुरू हो गई। गांव में तभी शोर मच गया कि अचानक बच्चे बीमार होने लगे हैं और उनको ग्रामीण अस्पताल में लेकर पहुंचे। अस्पताल में चिकित्सक भी शुरू में यह नहीं समझ सके कि आखिर इस तरह खिचड़ी खाने से बच्चों की हालत कैसे बिगड़ सकती है। वहां जांच के बाद पूरी स्थिति साफ हो गई और नशीला पदार्थ के कारण बच्चों की ऐसी हालत होने की बात कही गई।
यह माना जा रहा है कि खिचड़ी में भांग या कोई नशीला पदार्थ मिला हुआ था। मगर जिस तरह से इतनी संख्या में बच्चों की हालत बिगड़ी, उसको देखते हुए जिलाधिकारी राजकमल यादव, एसपी अर्पित विजयवर्गीय, सीएमएस डाॅ. एसके चौधरी, एसडीएम पूजा चौधरी, सीओ देवेंद्र शर्मा, सीओ विजय चौधरी समेत अन्य वहां पहुंच गए।
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अस्पताल में बच्चों व उनके परिजनों से बातचीत करके सभी गांव में पहुंचे। जहां प्रधान के परिजनों व अन्य गणमान्य लोगों को साथ लेकर मुनादी कराई गई कि अगर किसी की हालत खराब हो रही है तो वह घर में न रहे, बल्कि बाहर आकर अपना उपचार कराए।
कई लोगों ने बताया कि उनको चक्कर आ रहे हैं, लेकिन उनकी हालत ज्यादा खराब नहीं थी। वहां कई घंटे रहकर स्थिति सामान्य होने पर अधिकारी वापस लौटे।

खिचड़ी को तलाश किया, जांच कराने की बात कही
जिस खिचड़ी के खाने के बाद बच्चों व अन्य की हालत खराब हुई है। उस खिचड़ी की जांच कराने के लिए जिलाधिकारी ने कहा तो टीम वहां जांच के लिए पहुंची। बताया गया कि खिचड़ी नहीं बची है और उसके बाद टीम वहां खिचड़ी तलाश करती रही। जिसके बाद उन लोगों से संपर्क किया गया, जिनकी हालत खराब हुई है। जिससे उनके यहां से खिचड़ी मिलने पर जांच कराई जा सके।

एंबुलेंस में पांच-पांच को लाना पड़ा, एक बेड पर दो का उपचार
फैजपुर निनाना गांव में जब बच्चों के बीमार होने की सूचना मिली तो एंबुलेंस वहां भेजी गई। वहां ज्यादा बच्चों को बीमार देखकर एक-एक एंबुलेंस में पांच-पांच बच्चों को लेकर आना पड़ा। वहीं अस्पताल में एमरजेंसी वार्ड में उनको भर्ती करके ग्लूकोज लगाई गई और उनका उपचार शुरू किया गया। वहां भी एक-एक बेड पर दो व तीन बच्चे रखे गए। उसके बाद उनको सामान्य वार्ड में भेजा गया तो वहां एक बैड पर दो-दो बच्चों को भर्ती किया गया। क्योंकि अस्पताल में बेड काफी कम पड़ गए थे। इसके अलावा पोषण पुर्नवास केंद्र में भी बच्चों को भर्ती किया गया। वहीं जब एमरजेंसी वार्ड से बच्चों को सामान्य वार्ड में लेकर गए तो परिजन उनको खुद ही उठाकर हाथ में ग्लूकोज की बोतल लेकर चल दिए।

चिकित्सकों ने कहा कि बच्चे खतरे से बाहर
जिला अस्पताल के सीएमएस डाॅ. एसके चौधरी ने बताया कि सभी बच्चों को भर्ती करके उपचार किया जा रहा है। किसी भी बच्चे को खतरा नहीं है और उनकी हालत रात में पूरी तरह से ठीक होने की उम्मीद है। उनके अनुसार नशीला पदार्थ के कारण शरीर पूरी तरह से सुस्त पड़ जाता है तो कई बार फूड प्वाइजनिंग की समस्या भी साथ में हो जाती है। इसलिए पहले सभी तरह का उपचार शुरू कर दिया है। जिससे किसी को कोई परेशानी नहीं हो।

परिजनों ने लगाए आरोप, कार्रवाई की मांग उठाई
अपने बच्चों की हालत बिगड़ने पर उनको अस्पताल में लेकर पहुंचे परिजनों ने अधिकारियों के सामने गांव के कई लोगों पर आरोप लगाए। उनका आरोप था कि गांव में कुछ लोग खुद भी काफी नशा करते है और वह आए दिन भंडारे के नाम पर इस तरह से बच्चों को बुलाकर कुछ भी खिला दिया जाता है। इस तरह के लोगों पर कार्रवाई होनी चाहिए। जिसपर अधिकारियों ने जांच के बाद कार्रवाई का आश्वासन दिया

इनका चल रहा अस्पताल में उपचार
वंश पुत्र विनोद, राजन पुत्र राहुल, सावन पुत्र राहुल, अक्षित पुत्र जगपाल, जगपाल पुत्र मलखान, वंश पुत्र सुनील, तमन्ना पुत्री देवेंद्र, आजाद पुत्र सुनील, छोटू पुत्र सुनील, सावन पुत्र पवन, तनु पुत्री देवेंद्र, विपिन पुत्र सुनील, देवेंद्र पुत्र रूपचंद, शगुन पुत्र रामकुमार, रविकांत भारद्वाज पुत्र रामवीर, शगुन पुत्र काला, कृष उर्फ बल्ली पुत्र काला, रूबी पत्नी काला, वितिन पुत्र शिव कुमार, सुभाष पुत्र ओमप्रकाश, सक्षम पुत्र भूरा आदि का अस्पताल में उपचार चल रहा है।
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