बड़ौत विधानसभा सीट
- जाटों में बिखराव होने के साथ ही हाथी की चाल धीमी होने पर फूल को होगा फायदा
- हाथी की चाल तेज होने और हाथ को मिले साथ पर हैंडपंप की राह होगी आसान
संवाद न्यूज एजेंसी
बागपत। जनपद दस फरवरी को हुए मतदान के बाद हर कोई जातीय समीकरण और विपक्षियों के वोट का आंकलन करते हुए हार-जीत का गणित लगा रहे है। इस गणित में बड़ौत विधानसभा सीट पर जाटों का रुख, हाथी की चाल और हाथ को मिला साथ अहम है। इससे ही भाजपा और रालोद प्रत्याशियों का भाग्य तक होगा। जाटों में बिखराव और हाथी की चाल धीमी होने से फूल को बड़ा फायदा मिलेगा तो इसके उलट होने पर हैंडपंप की राह आसान हो जाएगी।
बागपत की तीनों विधानसभा सीटों बागपत, बड़ौत व छपरौली में पहले ही चरण में मतदान हो गया था। इसके बाद से हर कोई प्रत्याशियों की हार-जीत का आंकलन करने में लगा है। बड़ौत विधानसभा सीट पर तीन लाख एक हजार 453 मतदाता है, जिनमें से एक लाख 94 हजार 529 मतदाताओं ने मतदान किया। इनमें एक लाख आठ हजार 347 पुरुष व 86 हजार 182 महिलाओं ने मतदान किया। बड़ौत शहर में अधिकतर बूथों पर मतदान प्रतिशत कम होने के बावजूद सिसाना, गौरीपुर जवाहर नगर, गौरीपुर मीतली, पदड़ा, सूजरा, क्यामपुर, ठोठरा सहित अन्य गांवों में लोगों ने खूब मतदान किया है। अब कमल कितना खिलेगा, यह जाटों के रुख व हाथी की चाल और हाथ को मिलने वाले साथ पर भी टिका है। इस सीट पर सबसे ज्यादा करीब 80 हजार जाट वोटर है। अगर जाटों में बिखराव होता है और हाथी की चाल धीमी रहती है तो कमल को फायदा होगा। हाथ को ज्यादा साथ नहीं मिलता है तो उससे फूल खिलने की राह में कोई अड़चन ही नहीं रहेगी। इस सीट पर मुस्लिम वोटर करीब 50 हजार है। उसके साथ जाट मिल जाता है तो हैंडपंप को चलने से कोई नहीं रोक सकता है।