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शक में कमजोर पड़ रहा सात जन्मों का बंधन

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बागपत के महिला थाने में शिकायत लेकर पहुंची महिला के साथ महिला थाना प्रभारी व अन्य पुलिस कर्मी - फोटो : BARAUT
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अंतरराष्ट्रीय महिला हिंसा उन्मूलन दिवस
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बागपत में दो साल में घरेलू हिंसा के आ चुके है 2800 से अधिक मामले
जनपद के इकलौते महिला थाने में हर माह दर्ज हो रहे 150 से ज्यादा घरेलू हिंसा के मामले
संवाद न्यूज एजेंसी
बड़ौत। दहेज की मांग पूरी न होने, महिलाओं के विरुद्ध यौन उत्पीड़न, फब्तियां कसने, छेड़खानी, वेश्यावृत्ति, गर्भधारण के लिए विवश करना, महिलाओं और लड़कियों को ख़रीदना-बेचना के अलावा घरेलू हिंसा के मामलों में आधी आबादी अपनों के ही सितम से कराह रही है। कभी पतियों के नशे का विरोध करना महंगा पड़ जाता है तो कभी दहेज की खातिर उत्पीड़न होता है। शासन-प्रशासन की ओर से घरेलू हिंसा रोकने के लिए किए जा रहे प्रयास नाकाफी साबित हो रहे हैं। आलम यह है कि दो साल में ही बागपत जिले में महिला हिंसा से जुडे़ तकरीबन 2800 से अधिक मामले सामने आ चुके है। हैरानी की बात यह भी है कि जनपद के एकमात्र महिला थाने में हर माह तकरीबन 150 से ज्यादा मामले घरेलू हिंसा के दर्ज हो रहे है। पहले सुलह कराने की कोशिश की जाती है, ना होने पर मुकदमा दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी जाती है।
कोरोना काल में बढ़े अधिक मामले
पुलिस प्रशासन के मुताबिक वर्ष 2020 में कोरोना काल में महिला हिंसा के मामले अधिक बढ़े है। पिछले साल तकरीबन 1100 मामले आए थे। इस साल 1700 मामले आए। कोरोना काल में इसलिए भी घरेलू हिंसा के मामले बढ़ें, क्योंकि पूरे परिवार के सदस्य एक साथ रहे। सभी की फरमाइश अलग-अलग रही। महिलाओं पर वर्क लोड अधिक रहा। काम में असमर्थ बताने पर मारपीट तक हुई। बातों-बातों पर महिलाओं को ताने मिले।
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केस नंबर एक : 26 जुलाई को बड़ौत कोतवाली क्षेत्र के एक गांव में महज छह साल की बच्ची की दुष्कर्म के बाद बेहरमी से ईटों से पीट-पीट कर हत्या कर दी गई थी। आरोपी उसी का पड़ोसी युवक निकला।
केस नंबर दो : आजाद नगर कालोनी में जनवरी माह में गांव ढूंढार जनपद शामली की रहने वाली पुष्पा (32) का शव फांसी पर लटका मिला था। पुष्पा के परिजनों ने इसह्य लेकर कोतवाली पर हंगामा किया था। ससुराल वालों पर दहेज की मांग पूरी न होने पर पुष्पा की हत्या का आरोप लगाया था। इसमें पति को गिरफ्तार कर लिया गया था।
केस नंबर तीन : ढोढ़रा गांव के जंगल में वर्ष 2019 में एक महिला का शव पड़ा मिला था। शव के पास उसकी दो साल की बच्ची भी मिली थी। मृतका की आज तक शिनाख्त नहीं हुई है। बच्ची को नगर के आस्था अस्पताल में भर्ती करा गया था। बाद में बच्ची को बालशाला में भेज दिया गया था।
केस नंबर चार : खत्री गढ़ी में गत वर्ष एक युवती का शव दीवार पर खिड़की में फांसी पर लटका मिला था। मृतक युवती के परिजनों ने नौसेना में तैनात दामाद पर हत्या का आरोप लगाकर कोतवाली में हंगामा कर शिकायत दर्ज कराई थी।
केस नंबर पांच-----
दस मई 2020 में नगर की गांधी रोड़ पर एक महिला का शव फांसी पर लटका मिला था। परिजनों ने उसके पति पर महिला की हत्या का आरोप लगाया था। इसके बाद पुलिस ने पति को हिरासत में ले लिया था।
एक साल में 400 मामलों में हो चुकी सुलह
महिला थाना पुलिस प्रभारी साक्षी सिंह के मुताबिक जनपद में दस थाने और एक महिला थाना है। अकेले महिला थाने में हर माह तकरीबन 150 से अधिक मामले आते है। घरेलू हिंसा के जो मामले आ रहे है, उनमें सबसे ज्यादा मामले पति-पत्नी के बीच शक करने के है। इसके बाद दहेज उत्पीड़न व उसके बाद एक-दूसरे में सहनशीलता न होना है। एक साल में पुलिस तकरीबन 400 से अधिक मामलों में सुलह करा चुकी है। जिला प्रोबेशन अधिकारी तुलिका शर्मा ने बताया कि महिला उत्पीड़न से संबंधित लगभग 15 केस हर माह आते है। ज्यादातर केस पति पत्नी के बीच शक के है। उसके बाद दहेज की मांग व घरेलू उत्पीड़न से संबंधित केस आते है।
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दंपती विवाद के मुख्य कारण
- पत्नी शिक्षित है और वह बाहर नौकरी करना चाहती है, लेकिन ससुराल का इंकार करना।
- ज्यादा समय तक मोबाइल पर बातचीत व सोशल मीडिया पर व्यतीत करना।
- पति को शराब पीने से रोकने पर भी महिलाओं के साथ मारपीट की घटना आम हो चुकी है।
- एक-दूसरे पर विश्वास ना करना।
- बिना बताए बाजार या अन्य कहीं जगह चले जाना।
- दहेज की मांग पूरी न होना।
- शादी के बाद काफी समय तक बच्चा पैैदा न होना।
- एक-दूसरे के अंदर सहनशीलता न होना।
सर्वप्रथम कोशिश यह रहती है कि रिश्ते बिखरे नहीं। इसे लेकर पहले परामर्श केंद्र में बुलाकर अलग-अलग तरीके से काउंसिलिंग की जाती है। इसके बाद भी दंपति के बीच में सुलह नहीं होती तो प्रकरण कोर्ट भेज दिया जाता है। - हरीश सिंह भदौरिया, सीओ।
घरेलू हिंसा से निपटने के लिए सरकार ने सराहनीय कदम
- मुख्यमंत्री हेल्पलाइन नंबर 1076।
- हर थाने में महिला हेल्प डेस्क स्थापित की गई है, जिनमें महिला कर्मी तैनात है।
- जनपद में महिला थाने के अलावा महिला रिपोर्टिंग चौकी थी स्थापित की गई है।
- महिला थाने में ही परिवार परामर्श केन्द्र भी स्थापित है।
- घरेलू हिंसा की शिकायत के लिए 181 पर कॉल कर सकती है महिलाएं।
- वूमन पावर लाइन यानी महिला उत्पीड़न की घटनाओं से संबंधित घटनाओं को लेकर महिलाएं 1090 पर भी शिकायत दर्ज कर सकती है। जो थाने नहीं आ सकती।
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