ग्राम सरूरपुर में तालाब के गंदे पानी को बोरिंग कराकर भूमिगत जल में उतारे जाने के बाद अब पानी ने अपना असर दिखाना शुरू कर दिया है। गांव में 400 से अधिक लोग बीमार हो चुके हैं। पानी से इतनी दुर्गंध उठ रही है कि कुछ हैंडपंपों, सबमर्सिबल, नलकूपों के पानी से तो जानवरों ने भी मुंह मोड़ लिया है।
ग्राम सरूरपुर में देवी के थान के समीप स्थित तालाब पर अतिक्रमण हो जाने के चलते संकरा हो गया और पानी की निकासी की व्यवस्था एवं सफाई न हो पाने के कारण ओवरफ्लो हो गया। तालाब की सफाई कराने, अतिक्रमण हटवाने अथवा पानी की निकासी की व्यवस्था कराने की बजाय तालाब में बोरिंग करा दिया गया और तालाब का पूरा पानी भूगर्भ जल में उतार दिया गया।
तालाब तो खाली हो गया। तालाब के इस पानी ने भूगर्भ जल को विषैला कर डाला। अमर उजाला ने दो सितंबर के अंक में इस घिनौने कारनामे का खुलासा भी किया। अब भूगर्भ जल में डाले गए तालाब के इस पानी ने असर दिखाना शुरू कर दिया है। हैंडपंप, सबमर्सिबल और नलकूप में प्रदूषित पानी आने लगा है।
इससे गांव के लोग बीमार पड़ने लगे हैं। जिला अस्पताल में सबसे अधिक भीड़ सरूरपुर के बुखार से पीड़ितों की है। यहां पर टायफाइड के मरीजों की संख्या अधिक है। गांव के लगभग 400 लोग इसकी चपेट में आ चुके हैं। गांव के स्थानीय चिकित्सकों के यहां भी मरीज हाऊसफुल हैं।
अधिकारियों के आंख-कान बंद ः ऐसा नहीं है कि अधिकारियों को इस कारनामे की जानकारी न हो। अमर उजाला में प्रकाशित होने के बाद कई अधिकारियों ने इस बाबत जानकारी ली, लेकिन किसी ने न तो इस बोरिंग को बंद कराया और न ही बोरिंग कराने वाले पर कोई कार्रवाई की।
शरीर में घुल रहा जहर
गांव के जीत सिंह का कहना है कि तालाब का पानी लोगों के शरीर में जहर बनकर घुल रहा है। वह स्वयं भी बीमार हो गए हैं। बुजुर्ग ओमपाल सिंह ने बताया कि तालाब में तो शौचालय का, नाले, नालियों का पानी जा रहा है। इस पानी ने गांव के हैंडपंपों के पानी को भी खराब कर दिया।
जांच के निर्देश दिए
जिलाधिकारी नरेंद्र शंकर पांडेय का कहना है कि उन्होंने मामले की जानकारी कराई है। एसडीएम सदर को जांच के आदेश दिए हैं। इस मामले में शीघ्र ही कार्रवाई कराई जाएगी।