रटौल। नगर में चार करोड़ रुपये से बनी पानी की टंकी दो साल से बंद पड़ी है और उससे पानी की आपूर्ति नहीं हो रही है। वहीं कस्बे के अधिकतर हैंडपंप से दूषित पानी निकल रहा है। जिससे लोगों के सामने पेयजल संकट गहरा रहा है। लोग को मजबूरी में दूषित पानी ही पीना पड़ रहा है।
लोगों को शुद्ध पेयजल की आपूर्ति करने के लिए कस्बे में वर्ष 2010 में चार करोड़ रुपये से टंकी का निर्माण कराया था। वर्ष 2012 में कस्बे में पेयजल लाइन बिछाने के बाद आपूर्ति शुरू कराई गई थी। दस साल से अधिक का समय बीतने के बाद भी अभी तक कस्बे के लगभग 60 प्रतिशत घरों तक ही टंकी का पानी पहुंच पाया है। अब पिछले दो साल से टंकी पूरी तरह से बंद पड़ी है। कस्बे में पेयजल की सप्लाई न होने से लोगों को हैंडपंप के दूषित पानी को पीने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
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खराब हो चुके हैं अधिकांश हैंडपंप
कस्बे में पेयजल आपूर्ति के लिए लगाए गए अधिकांश हैंडपंप खराब हो चुके हैं और जो हैंडपंप ठीक हैं, उनके दूषित पानी निकल रहा है। टंकी से पानी की सप्लाई न होने के कारण लोगों को दूषित पानी पीने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। कुछ हैंडपंप से पीला पानी निकल रहा है तो कुछ हैंडपंप से निकलने वाला पानी कुछ देर बाद ही पीला पड़ जाता है।
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दूषित पानी पीने के लिए मजबूर
- हसमत चौधरी का कहना है कि पेयजल की सप्लाई न होने लोगों को हैंडपंपों का सहारा लेना पड़ रहा है। साहिर चौधरी ने बताया कि टंकी बंद पड़ी है और कस्बे के अधिकतर हैंडपंप से दूषित पानी निकल रहा है। बेदीराम ने बताया कि हैंडपंप से पीला पानी निकल रहा है। दूषित पानी पीने के कारण लोग बीमार हो रहे हैं। सब्बीर अब्बासी का कहना है कि 13 साल बीत गए हैं, मगर अभी तक पूरे कस्बे में पेयजल लाइन नहीं बिछाई गई है। जहां पेयजल लाइन है, वहां भी दो साल से सप्लाई नहीं हो रही है।
कोट...
- पेयजल टंकी नगर पंचायत को हैंडओवर नहीं हुई है। कस्बे में पानी के कनेक्शनों का भी सत्यापन कराया जा रहा है। कस्बे के हैंडपंपों की जांच कराई जाएगी। - वीरज कुमार त्रिपाठी, अधिशासी अधिकारी
1टौल स्थिृत पानी की टंकी