बागपत। स्वामी दयानंद सरस्वती की 200वीं जयंती को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मनाने का फैसला हो गया है। उन पर डाक टिकट भी जारी किया जाएगा। सांसद डॉ. सत्यपाल सिंह ने इसके लिए पीएम मोदी और केंद्रीय दूरसंचार राज्यमंत्री देवुसिंह चौहान को पत्र लिखा था। जहां प्रधानमंत्री ने इसको मंजूरी देते हुए योजना बनवाने की बात कही है, वहीं दूरसंचार मंत्री ने सांसद को पत्र भेजकर जल्द टिकट जारी करने की बात बताई है।
सांसद ने तीन महीने पहले पीएम मोदी को स्वामी दयानंद सरस्वती की जयंती मनाने के लिए पत्र लिखा था। जिसमें कहा था कि स्वामी दयानंद की 200वीं जयंती वर्ष 2024 में आएगी। स्वामी दयानंद सरस्वती ने 19वीं सदी में भारत में राष्ट्र चेतना जागृत करने, स्वराज्य व स्वदेशी की भावना पैदा करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उनके इस योगदान व उनके प्रति लोगों की भावनाओं को देखते हुए उनकी 200वीं जयंती को राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्साह के साथ मनाया जाना चाहिए। इसके लिए कुछ विशेष कार्यक्रम कराने के लिए योजनाएं बनाई जाएं। सभी शिक्षण संस्थाओं में जरूर कार्यक्रम हो और केंद्र व राज्य सरकारों की संस्थाओं में भी कार्यक्रम कराए जाए। अन्य देशों में भारतीय दूतावासों में स्वामी दयानंद सरस्वती की जयंती को मनाया जाए। सांसद डाॅ. सत्यपाल सिंह ने बताया कि उनके इस आग्रह को स्वीकार कर लिया है। प्रधानमंत्री ने स्वामी दयानंद की 200वीं जयंती को बड़े स्तर पर मनवाने का फैसला लिया है।
हरियाणा-यूपी को जोड़ने वाला पुल स्वामी दयानंद के नाम पर होगा
हरियाणा-यूपी को जोड़ने के लिए टांडा में यमुना नदी पर बन रहे पुल को स्वामी दयानंद सरस्वती के नाम पर जाना जाएगा। सरकार ने उसका नाम तय कर दिया है। सांसद के अनुसार छपरौली पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की कर्म भूमि रही है। वहां से उनका ज्यादा लगाव था। इसको देखते हुए ही पुल स्वामी दयानंद सरस्वती के नाम पर होगा। क्योंकि स्वामी दयानंद सरस्वती ही चौधरी चरण सिंह के गुरु थे और उस पुल को गुरु के नाम पर पहचाना जाएगा तो यह क्षेत्र के लिए बड़े गौरव की बात रहेगी।